भारतीय शिक्षा बोर्ड 21वीं सदी की समग्र शिक्षा का मॉडल, विकसित भारत के निर्माण में निभाएगा अहम भूमिका : डॉ. एनपी सिंह
प्रदीप मिश्रा, प्रमुख संवाददाता

Gonda News
गोंडा। भारतीय शिक्षा बोर्ड की मंडल स्तरीय बैठक शुक्रवार को शहर स्थित फातिमा सीनियर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित हुई। कार्यक्रम में देवीपाटन मंडल के गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती और बलरामपुर जनपदों के विद्यालयों के प्रबंधक, प्रधानाचार्य एवं शिक्षाविदों ने सहभागिता की। मुख्य अतिथि जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन (आईएएस) रहीं, जबकि भारतीय शिक्षा बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. एन. पी. सिंह ने मुख्य वक्ता के रूप में शिक्षा के बदलते स्वरूप और भारतीय शिक्षा बोर्ड की अवधारणा पर विस्तार से प्रकाश डाला।
डॉ. एन. पी. सिंह ने कहा कि भारतीय शिक्षा बोर्ड केवल परीक्षा आयोजित करने वाला संस्थान नहीं, बल्कि 21वीं सदी के भारत की नई शिक्षा दृष्टि का प्रतिनिधित्व करता है। इसका उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण करना है, जो ज्ञान, कौशल, संस्कार और चरित्र—इन चारों आयामों में समृद्ध होकर विकसित भारत के निर्माण में नेतृत्वकारी भूमिका निभा सकें।
उन्होंने बताया कि भारतीय शिक्षा बोर्ड की शिक्षा व्यवस्था सात मूलभूत सिद्धांतों पर आधारित है। इसमें सामर्थ्य और संस्कार, आधुनिक ज्ञान एवं भारतीय ज्ञान प्रणाली, अकादमिक शिक्षा और कौशल विकास, दृष्टि और दक्षता, बोध और शोध, प्रतियोगिता और नवाचार तथा विचारधारा और प्रौद्योगिकी के समन्वय को विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, तकनीकी दक्षता, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता के साथ-साथ प्रेम, करुणा, सत्यनिष्ठा, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे भारतीय जीवन मूल्यों का विकास भी समान रूप से आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि भारतीय शिक्षा बोर्ड में कक्षा छह से कौशल आधारित शिक्षा प्रारंभ की गई है तथा कक्षा नौ से बारह तक राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT) के सहयोग से ओ-लेवल कंप्यूटर शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे विद्यार्थी उच्च शिक्षा के साथ-साथ रोजगार और स्वरोजगार के लिए भी तैयार हो सकें।
डॉ. सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और राष्ट्रीय कौशल योग्यता रूपरेखा (NSQF) के अनुरूप भारतीय शिक्षा बोर्ड ने विभिन्न सेक्टर स्किल काउंसिलों और संस्थानों के साथ समझौते किए हैं। इसके तहत विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा एनालिटिक्स, वेब डिजाइनिंग, पर्यटन एवं आतिथ्य प्रबंधन, ग्रीन एनर्जी, सौर ऊर्जा, हस्तशिल्प तथा डिजिटल तकनीक जैसे रोजगारपरक क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही उद्योग आधारित प्रायोगिक प्रशिक्षण, पतंजलि इंडस्ट्रीज में 15 दिवसीय इंटर्नशिप, उद्यमिता विकास और स्टार्टअप के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय शिक्षा बोर्ड का गठन भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा किया गया है। यह सीबीएसई के समकक्ष राष्ट्रीय शिक्षा बोर्ड है, जिसके प्रमाण-पत्रों को समान वैधानिक मान्यता प्राप्त है।
मुख्य अतिथि जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों का समग्र विकास है। भारतीय शिक्षा बोर्ड आधुनिक शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा, कौशल विकास और जीवन मूल्यों के समन्वय के माध्यम से इस लक्ष्य की दिशा में प्रभावी प्रयास कर रहा है। उन्होंने विद्यालयों से गुणवत्तापूर्ण, नवाचार आधारित और कौशलयुक्त शिक्षा को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
बैठक के दौरान विद्यालयों के प्रबंधकों एवं प्रधानाचार्यों ने भारतीय शिक्षा बोर्ड की संबद्धता, परीक्षा प्रणाली, कौशल शिक्षा तथा विभिन्न योजनाओं से जुड़े प्रश्नों का समाधान प्राप्त किया।
कार्यक्रम का संचालन क्षेत्रीय समन्वयक बृजमोहन ने किया। इस अवसर पर जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. रामचंद्र, बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह, स्वामी अभिषेकदेव, फादर अरुण मोरस, मंडल समन्वयक राजन विश्वकर्मा, सुधांशु द्विवेदी, नमन, आशीष, श्रवण अग्रवाल, मणि अग्रवाल, सत्य प्रकाश सहित मंडल के सैकड़ों विद्यालयों के प्रबंधक, प्रधानाचार्य एवं शिक्षाविद उपस्थित रहे।