26 मई तक चली जाएगी प्रधान जी की प्रधानी, उल्टी गिनती शुरू

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26 मई तक चली जाएगी प्रधान जी की प्रधानी
पंचायतों का कार्यकाल पूरा होते ही खत्म हो जाएंगे वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार, चुनाव तक प्रशासकीय समितियां संभालेंगी जिम्मेदारी
शासन से अभी साफ नहीं हो पाई है स्थिति 
प्रधान संघों की मांग- बढ़ाया जाए कार्यकाल, प्रशासकीय समिति में प्रधानों को मिले नेतृत्व
आरक्षण, परिसीमन, जनगणना और कर्मचारियों की कमी के चलते पंचायत चुनाव टलने के बढ़े आसार
प्रदीप मिश्रा, प्रमुख संवाददाता

Gonda News
गोंडा। जिले की 1192 में से 1183 ग्राम पंचायतों में 26 मई के बाद “प्रधान जी” की प्रधानी समाप्त हो जाएगी। पंचायती राज अधिनियम के प्रावधानों के तहत ग्राम पंचायतों का निर्धारित पांच वर्षीय कार्यकाल पूरा होते ही प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों और ग्राम पंचायत सदस्यों के प्रशासनिक व वित्तीय अधिकार स्वतः समाप्त हो जाएंगे। इसके बाद पंचायतों का संचालन प्रशासकीय समितियों के माध्यम से कराया जाएगा।
जिले के पंचायत प्रतिनिधियों में इसे लेकर हलचल तेज हो गई है। प्रधान संघ लगातार सरकार से मौजूदा प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। साथ ही यह भी मांग उठाई जा रही है कि जब तक चुनाव न हों, तब तक बनने वाली प्रशासकीय समितियों का मुखिया वर्तमान प्रधानों को ही बनाया जाए ताकि गांवों में विकास कार्य प्रभावित न हों।
जिला पंचायत राज अधिकारी लाल जी दुबे ने बताया कि पंचायती राज अधिनियम के अनुसार वर्तमान ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है। कार्यकाल पूरा होने के बाद पंचायतों के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार समाप्त हो जाएंगे और आगे की व्यवस्था शासन के निर्देशों के अनुसार संचालित की जाएगी।

पहली बैठक के आधार पर तय होता है पंचायतों का कार्यकाल
डीपीआरओ ने बताया कि वर्ष 2021 के पंचायत चुनाव के बाद ग्राम पंचायतों की पहली बैठक दो चरणों में आयोजित की गई थी। जिले की आधे से अधिक ग्राम पंचायतों में पहली बैठक 21 मई 2021 को हुई थी, जबकि शेष पंचायतों में यह बैठक 26 मई 2021 को आयोजित की गई थी।
पंचायती राज अधिनियम के अनुसार ग्राम पंचायतों का कार्यकाल पहली बैठक की तिथि से पांच वर्ष माना जाता है। इसी आधार पर जिले की अधिकांश पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को पूरा हो रहा है।
हालांकि जिले की नौ ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जहां अदालत के आदेश के बाद बाद में चुनाव हुए थे। इन पंचायतों में पहली बैठक अलग समय पर आयोजित हुई थी, इसलिए उनका कार्यकाल अभी समाप्त नहीं होगा।
जिले में 1183 प्रधानों के अधिकार होंगे खत्म
वर्ष 2021 में पुनर्गठन और परिसीमन की कार्रवाई के बाद जिले में ग्राम पंचायतों की संख्या 1080 से बढ़कर 1214 हो गई थी। इसके बाद बेलसर, तरबगंज और धानेपुर नगर पंचायतों के गठन से 22 ग्राम पंचायतों का अस्तित्व समाप्त हो गया।
वर्तमान में जिले में कुल 1192 ग्राम पंचायतें बची हैं। इनमें से 1183 पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही संबंधित प्रधानों के सभी वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार भी खत्म हो जाएंगे।
एडीओ पंचायत और सचिवों के हाथों में जाएगी पंचायतों की कमान 
कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम पंचायतों के संचालन के लिए प्रशासकीय समितियां गठित की जाएंगी। सूत्रों के अनुसार इन समितियों में एडीओ पंचायत और ग्राम पंचायत सचिव की प्रमुख भूमिका होगी। यही समितियां गांवों में जरूरी प्रशासनिक और विकास कार्यों का संचालन करेंगी।
इसी मुद्दे को लेकर प्रधान संघ लगातार मांग कर रहे हैं कि गांव की जनता द्वारा चुने गए प्रधानों को ही प्रशासकीय समितियों का नेतृत्व सौंपा जाए ताकि विकास कार्यों की निरंतरता बनी रहे।
चुनाव से पहले आरक्षण की बड़ी बाधा
पंचायत चुनाव कराने से पहले पंचायतों के विभिन्न पदों के आरक्षण की प्रक्रिया पूरी की जानी जरूरी है। शासन से आदेश जारी होने के बाद पंचायत विभाग को ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायत सीटों का आरक्षण तय करना होगा।
इसके बाद आपत्तियां मांगी जाएंगी और उनका निस्तारण किया जाएगा। यही प्रक्रिया चुनाव कार्यक्रम में सबसे अधिक समय लेने वाली मानी जा रही है।
इस बार यह भी बड़ा सवाल बना हुआ है कि आरक्षण नई व्यवस्था के तहत तय होगा या फिर पूर्व की तरह चक्रानुक्रम प्रणाली लागू रहेगी। इस संबंध में शासन स्तर पर गठित समर्पण आयोग की सिफारिशों का इंतजार किया जा रहा है।
पंचायत विभाग के जानकारों का मानना है कि केवल आरक्षण प्रक्रिया पूरी करने में ही कई महीने लग सकते हैं।
जनगणना और कर्मचारियों की कमी भी बनी हुई है चुनाव टालने की बड़ी वजह
पंचायत चुनाव टलने की सबसे बड़ी वजहों में जनगणना प्रक्रिया को भी माना जा रहा है। देश में जनगणना 2027 की अधिसूचना जारी होने के बाद 22 मई से हाउस होल्ड सर्वे शुरू कराया जाना है।
जनगणना कार्य में जिले के करीब आठ हजार शिक्षक लगाए गए हैं। ऐसे में पंचायत चुनाव के लिए पर्याप्त कार्मिक जुटाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
गोंडा जिले में स्थायी, अस्थायी, संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को मिलाकर कुल करीब 20 हजार कर्मचारी हैं, जबकि पंचायत चुनाव संपन्न कराने के लिए लगभग इतनी ही संख्या में कर्मचारियों की जरूरत पड़ती है।
जिले में चार हजार से अधिक पोलिंग बूथ हैं। बूथों पर तैनात बीएलओ को चुनाव ड्यूटी से अलग रखना होगा। ऐसे में चुनाव कराने के लिए कर्मचारियों की उपलब्धता और कठिन हो जाएगी।
अब विधानसभा चुनाव के बाद हो सकते हैं पंचायत चुनाव
प्रशासनिक और व्यावहारिक परिस्थितियों को देखते हुए पंचायत चुनाव अगले वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव के बाद कराए जाने की चर्चाएं तेज हैं। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह माना जा रहा है कि फरवरी-मार्च 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव के बाद ही पंचायत चुनाव कराए जाने की संभावना अधिक है।
यदि ऐसा होता है तो पंचायतों का संचालन लंबे समय तक प्रशासकीय समितियों के माध्यम से किया जा सकता है।
“चुनाव कराने की तैयारी पूरी” : सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी नारायण 

पंचायत चुनाव के सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी नारायण ने बताया कि चुनाव कराने के लिए प्रशासनिक स्तर पर सभी तैयारियां पूरी हैं।
उन्होंने कहा कि मतपत्र, मतपेटिकाएं और चुनाव संपन्न कराने वाली टीमों का गठन किया जा चुका है। राज्य निर्वाचन आयोग से जैसे ही चुनाव कार्यक्रम घोषित होगा, चुनाव प्रक्रिया शुरू करा दी जाएगी।

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