सम्भव अभियान 6.0 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर प्रशिक्षण
कुपोषित बच्चों की पहचान से लेकर नियमित फॉलोअप तक की रणनीति पर हुई विस्तृत चर्चा
प्रदीप मिश्रा, प्रमुख संवाददाता

Gonda News
गोण्डा, 21 अगस्त 2026। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से संचालित सम्भव अभियान 6.0 को जनपद में प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए शुक्रवार को जिला पंचायत सभागार में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में कुपोषित एवं अति-कुपोषित बच्चों की पहचान, नियमित वृद्धि निगरानी, पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावी पहुंच, बच्चों के समुचित प्रबंधन और नियमित फॉलोअप को लेकर विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि अभियान का उद्देश्य केवल कुपोषित बच्चों को चिन्हित करना नहीं, बल्कि उनकी पोषण स्थिति में वास्तविक सुधार लाना है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में यूनिसेफ के स्टेट प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर रवि प्रकाश श्रीवास्तव, विक्रमशिला की स्टेट प्रतिनिधि समर्पिता, स्टेट प्रतिनिधि सोनल, बाल विकास परियोजना अधिकारी बभनजोत दुर्गेश कुमार गुप्ता, बाल विकास परियोजना अधिकारी पंडरी कृपाल आनन्द प्रकाश श्रीवास्तव, जिला समन्वयक राज कुमार सहित समस्त मुख्य सेविकाओं ने प्रतिभाग किया।
0 से 6 वर्ष तक के बच्चों की होगी नियमित वृद्धि निगरानी
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि सम्भव अभियान 6.0 के तहत 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों की नियमित वृद्धि निगरानी को विशेष प्राथमिकता दी जानी है। आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चों के वजन तथा लंबाई/ऊंचाई की नियमित माप कर उनकी वृद्धि की स्थिति का आकलन किया जाएगा। वृद्धि निगरानी के आधार पर जोखिम वाले बच्चों को समय रहते चिन्हित कर उनके समुचित प्रबंधन की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों ने SAM एवं MAM श्रेणी के बच्चों की पहचान, कुपोषित बच्चों के प्रबंधन, नियमित फॉलोअप तथा आवश्यकता पड़ने पर स्वास्थ्य संस्थानों को संदर्भित किए जाने की प्रक्रिया के बारे में मुख्य सेविकाओं को विस्तार से जानकारी दी।
पोषण के साथ स्वास्थ्य सेवाओं का बेहतर समन्वय जरूरी
प्रशिक्षण में इस बात पर भी जोर दिया गया कि कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए केवल आंगनबाड़ी केन्द्रों तक सीमित प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के साथ स्वास्थ्य विभाग और सहयोगी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। कुपोषित बच्चों को चिन्हित करने के बाद उनकी स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं का आकलन कर उन्हें जरूरत के अनुसार स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने और उपचार के बाद नियमित फॉलोअप सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
अधिकारियों ने कहा कि बच्चों के पोषण स्तर में सुधार के लिए परिवारों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से अभिभावकों को पोषण, स्वच्छता, स्वास्थ्य एवं बच्चों के खान-पान से संबंधित व्यवहार अपनाने के लिए लगातार जागरूक किया जाना आवश्यक है।
Poshan Tracker पर समयबद्ध अपडेट के निर्देश
प्रशिक्षण में Poshan Tracker को लेकर भी मुख्य सेविकाओं को महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए गए। लाभार्थियों से संबंधित सूचनाओं को सही एवं समयबद्ध ढंग से अपडेट करने तथा अभियान के तहत संचालित गतिविधियों की प्रगति को नियमित रूप से दर्ज करने पर विशेष जोर दिया गया।
मुख्य सेविकाओं को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रभावी मार्गदर्शन एवं पर्यवेक्षण सुनिश्चित करें। बच्चों की वृद्धि निगरानी, कुपोषित बच्चों की पहचान, फॉलोअप तथा पोषण सेवाओं की उपलब्धता में किसी प्रकार की लापरवाही न हो, इसके लिए नियमित समीक्षा की जाए।
लक्ष्य सिर्फ पहचान नहीं, कुपोषण से मुक्ति है
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि सम्भव अभियान 6.0 को महज एक अभियान के रूप में न लेकर इसे बच्चों की पोषण स्थिति में स्थायी सुधार लाने के प्रयास के रूप में संचालित किया जाना चाहिए। कुपोषित बच्चे की पहचान होने के बाद उसके पोषण एवं स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार होने तक लगातार निगरानी और फॉलोअप जरूरी है।
उन्होंने कहा कि समय पर पहचान, उचित प्रबंधन, परिवार को परामर्श, स्वास्थ्य विभाग से समन्वय और Poshan Tracker पर सही डाटा उपलब्ध होने से अभियान की प्रभावशीलता बढ़ेगी। सभी संबंधित कर्मियों की सक्रिय भागीदारी से ही कुपोषण मुक्त गोण्डा के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
जिलेभर से मुख्य सेविकाओं ने किया प्रतिभाग
प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के विभिन्न विकासखंडों से मुख्य सेविकाओं ने प्रतिभाग किया। बभनजोत से सोनम, आरती देवी, निधि पाण्डेय, प्रियंका, रुचि, कुमारी प्रीति भारती व सरोज सिंह; छपिया से मीनाक्षी सोनी, अनुपम मिश्रा, रंजना सिंह व इन्द्रावती; कर्नलगंज से कलावती, दुर्गेश कुमारी, नीलम सिंह, विभा वर्मा व रीता यादव; कटरा बाजार से इबरत बेगम, मंजू मौर्या, निधि वर्मा, गरिमा त्रिपाठी व पुष्पा देवी शामिल रहीं।
इसी क्रम में नवाबगंज से मीना उपाध्याय, प्रीती सिंह, दिपाली सिंह, मोहिनी मौर्या, ज्योति सिंह व मिताली सिंह; रुपईडीह से सुमिता वर्मा, सुषमा, सरिता देवी, किरण देवी, प्रतिभा सिंह, नीलू व दीपाली मिश्रा; वजीरगंज से बबली रावत, रेखा मौर्या, ज्योत्सना, संयोगिता यादव व सुप्रिया तथा मनकापुर से ललित कुमारी, शमा परवीन, मानसी शुक्ला, सुनीता सिंह व निशि द्विवेदी ने प्रतिभाग किया।
वहीं बेलसर से प्रज्ञा दुबे, सरिता पासवान व कोमल श्रीवास्तव; सिटी से दिव्या पाठक, अनुष्मा तिवारी, नेहा परवीन, शिवांगी, मोनिका नायक व सुशीला सिंह; हलधरमऊ से शैली, मनीषा अवस्थी, उपासना तिवारी, रचना देसवाल व सुषमा; इटियाथोक से शिवानी साहू, ज्योति वर्मा, दीपा यादव व हेमलता तिवारी ने प्रशिक्षण में हिस्सा लिया।
इसके अलावा झंझरी से तस्मिया, प्रीति पाण्डेय, रीना देवी, शकुंतला देवी, सोनी तिवारी व कुमारी सरिता; मुजेहना से नम्रता शुक्ला, दीपिका पाण्डेय, पिंकी सिंह, रेखा, अंकिता श्रीवास्तव व गरिमा राजन; पंडरी कृपाल से प्रियंका वर्मा, गीता विश्वकर्मा, प्रियंका मिश्रा व लक्ष्मी यादव; परसपुर से आरती गौतम, साधना साहू, तृप्ति पाण्डेय, प्रियंका भारती व सुमन गौतम तथा तरबगंज से प्रीति आनंद, रिम्पी सिंह व उर्मिला देवी सहित अन्य मुख्य सेविकाएं मौजूद रहीं।
समयबद्ध लक्ष्य पूरा करने का आह्वान
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों से अपने-अपने क्षेत्रों में सम्भव अभियान 6.0 की गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने, निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध रूप से पूरा करने और आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पोषण सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया। अधिकारियों ने कहा कि अभियान की सफलता तभी संभव है जब प्रत्येक स्तर पर जिम्मेदारी और जवाबदेही के साथ कार्य किया जाए।
प्रशिक्षण कार्यक्रम ने जिले में कुपोषण के खिलाफ चल रहे प्रयासों को और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में भूमिका निभाई। विभाग का जोर अब कुपोषित बच्चों की पहचान के साथ-साथ उनके नियमित फॉलोअप, पोषण स्थिति में सुधार और स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करने पर है।

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