आपराधिक मामलों के दागी व्यापारी अमित अग्रवाल को डीएम ने किया जिलाबदर

उत्तर प्रदेश गोंडा

 

रंगदारी, जालसाजी और गैंगस्टर के आरोपों से घिरे अमित अग्रवाल को डीएम ने घोषित किया ‘गुण्डा’, छह माह के लिए गोंडा से किया जिलाबदर
जिला मजिस्ट्रेट प्रियंका निरंजन ने दिया आदेश; अदालत ने कहा—आरोपी की गतिविधियां जनसामान्य के लिए भय और संकट का कारण, पुलिस की चालानी रिपोर्ट व आपराधिक इतिहास को माना पर्याप्त आधार
प्रदीप मिश्रा, प्रमुख संवाददाता

Gonda News

गोण्डा। जनपद के चर्चित कारोबारी अमित अग्रवाल के विरुद्ध चल रही गुण्डा नियंत्रण अधिनियम की कार्यवाही में जिला मजिस्ट्रेट प्रियंका निरंजन ने बड़ा फैसला सुनाते हुए उन्हें उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण अधिनियम, 1970 की धारा 3(1) के तहत “गुण्डा” घोषित कर दिया है। न्यायालय ने आदेश दिया है कि अमित अग्रवाल  पुत्र स्व कृष्ण कुमार अग्रवाल आगामी छह माह तक जनपद गोण्डा की सीमा से बाहर रहेंगे और इस अवधि में बिना पूर्व अनुमति जिले में प्रवेश नहीं कर सकेंगे।

जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष पुलिस द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में अमित अग्रवाल को ऐसा व्यक्ति बताया गया, जिसकी सामान्य ख्याति दुस्साहसिक एवं समाज के लिए खतरनाक है। रिपोर्ट में कहा गया कि उसके भय के कारण आम लोग न तो थाने में शिकायत दर्ज कराने का साहस करते हैं और न ही न्यायालय में गवाही देने को तैयार होते हैं। न्यायालय ने उपलब्ध अभिलेखों, पुलिस रिपोर्ट, बीट सूचनाओं तथा आपराधिक इतिहास का परीक्षण करने के बाद इन तथ्यों को गंभीर माना।

अमित पर रंगदारी मांगने का गंभीर आरोप

न्यायालय के आदेश में वर्ष 2024 में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 560/2024 का विशेष उल्लेख किया गया है। इस मामले में आरोप है कि अमित अग्रवाल ने एक व्यवसायी से 70 लाख रुपये की रंगदारी मांगी और रकम न देने पर उसे तथा उसके परिवार को जान से मारने की धमकी दी। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि लगातार फोन कॉल के माध्यम से धमकियां दी गईं और रंगदारी न देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई। पुलिस विवेचना के बाद इस मामले में आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया जा चुका है।

फर्जी दस्तावेजों से जमीन हड़पने का लग चुका है आरोप

दूसरा प्रमुख मामला वर्ष 2023 का है, जिसमें लेखपाल एवं सचिव भू-प्रबंध समिति की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया। आरोप है कि फर्जी और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर जमीन का बैनामा कराया गया। इस मामले में भी विवेचना के बाद पुलिस ने अमित अग्रवाल के विरुद्ध धोखाधड़ी, जालसाजी, कूटरचना और आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं में आरोपपत्र दाखिल कर दिया है।

गवाहों पर दबाव डालने की बीट रिपोर्ट

पुलिस द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत दो बीट सूचनाओं में उल्लेख किया गया कि अमित अग्रवाल मुकदमों के वादी और गवाहों पर दबाव बना रहे हैं ताकि वे न्यायालय में गवाही न दे सकें। जांच में इन सूचनाओं को सत्य पाए जाने का भी उल्लेख किया गया, जिसके आधार पर न्यायालय ने माना कि आरोपी की गतिविधियां समाज में भय का वातावरण उत्पन्न कर रही हैं।

पुराना आपराधिक इतिहास भी बना आधार

जिला मजिस्ट्रेट के आदेश में यह भी दर्ज है कि अमित अग्रवाल के विरुद्ध वर्ष 2010 से विभिन्न प्रकार के आपराधिक मुकदमे दर्ज होते रहे हैं। इनमें मारपीट, धमकी, धोखाधड़ी, जालसाजी, आईटी एक्ट, गैंगस्टर एक्ट सहित अन्य मामलों का उल्लेख किया गया है। न्यायालय ने कहा कि वर्ष 2010 से लगातार दर्ज मुकदमों, दो एनसीआर और बीट रिपोर्टों से यह स्पष्ट होता है कि आरोपी गंभीर अपराधों का अभ्यस्त है।

आरोपी ने बताया खुद को निर्दोष

सुनवाई के दौरान अमित अग्रवाल की ओर से दाखिल आपत्ति में कहा गया कि वह एक व्यापारी हैं और उनके विरुद्ध राजनीतिक एवं व्यापारिक प्रतिद्वंद्विता के चलते झूठे मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि गुण्डा एक्ट की कार्यवाही बिना स्वतंत्र न्यायिक विचार के केवल पुलिस रिपोर्ट के आधार पर शुरू की गई, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। उच्चतम एवं उच्च न्यायालय के कई निर्णयों का हवाला देते हुए नोटिस निरस्त करने की मांग की गई।

न्यायालय ने खारिज की दलीलें

जिला मजिस्ट्रेट ने बचाव पक्ष की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। आदेश में कहा गया कि पुलिस चालानी रिपोर्ट, आपराधिक इतिहास, आरोपपत्र, बीट सूचनाएं और उपलब्ध अभिलेख आरोपी की आपराधिक प्रवृत्ति तथा समाज में व्याप्त भय की पुष्टि करते हैं। न्यायालय ने माना कि आरोपी का आचरण उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण अधिनियम, 1970 में वर्णित “गुण्डा” की परिभाषा के अंतर्गत आता है।

छह माह के लिए किया गया जिलाबदर

आदेश के अनुसार अमित अग्रवाल को छह माह तक जनपद गोण्डा की सीमा से बाहर रहने का निर्देश दिया गया है। यदि उन्हें किसी न्यायालय में उपस्थित होना होगा तो वे न्यायिक कार्यवाही के लिए बिना अलग अनुमति के उपस्थित हो सकेंगे। आदेश के पालन की जिम्मेदारी पुलिस अधीक्षक गोण्डा को सौंपी गई है।

 

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