अशर्फी लाल चैरिटेबल ट्रस्ट ने फिर पेश की मानवता की मिसाल
कड़ाके की ठण्ड में दर्जनों जरूरतमंदों को बांटे कंबल
प्रदीप मिश्रा, प्रमुख संवाददाता*
Gonda News
गोंडा। शीतलहर और कड़ाके की ठंड से जनजीवन बेहाल है। ऐसे कठिन समय में यदि किसी जरूरतमंद को एक गर्म कंबल मिल जाए तो वह किसी सहारे से कम नहीं होता। इसी सोच को जमीन पर उतारते हुए अशर्फी लाल चैरिटेबल ट्रस्ट ने इंसानियत और सामाजिक सरोकार की सशक्त मिसाल पेश की। ट्रस्ट की ओर से शनिवार को पंडितपुर, मनकापुर स्थित अशर्फी लाल स्मारक स्थल पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान विभिन्न गांवों से आए 51 जरूरतमंदों को कंबल वितरित किए गए।
यह सेवा कार्य स्वर्गीय अशर्फी लाल, जो सहायक जिला लेखा परीक्षा अधिकारी के पद पर कार्यरत रहे, की पुण्य स्मृति में उनके तीन पुत्रों रणजीत, बलजीत और इन्द्रजीत द्वारा किया जा रहा है। पिता के सामाजिक संस्कारों और सेवा भाव को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से उनके पुत्रों ने अशर्फी लाल चैरिटेबल ट्रस्ट का गठन किया है। ट्रस्ट द्वारा प्रत्येक वर्ष उनके स्मृति दिवस पर जरूरतमंदों को कंबल वितरण कर ठंड से राहत पहुंचाने का कार्य लगातार किया जा रहा है।
शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में ट्रस्ट के पदाधिकारियों संवारी देवी, मीना कुमारी आर्य, शुभम सिंह, आदर्श सिंह और मासूम सिंह ने श्रद्धा और सेवा भाव के साथ कंबल वितरण कराया। कंबल पाने वालों में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल रहे। कई बुजुर्गों के चेहरे पर संतोष और राहत की झलक दिखाई दी। एक बुजुर्ग महिला ने भावुक होते हुए कहा कि इस भीषण ठंड में मिला कंबल उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य ट्रस्टी मीना कुमारी आर्य ने कहा कि समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्ग की सेवा ही सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने आश्वस्त किया कि भविष्य में भी ट्रस्ट के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा से जुड़े कार्य निरंतर किए जाते रहेंगे। उन्होंने बताया कि अशर्फी लाल का जीवन ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और समाजसेवा को समर्पित रहा, और ट्रस्ट उसी विचारधारा को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।
कंबल वितरण से पूर्व उपस्थित लोगों ने अशर्फी लाल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके द्वारा किए गए सामाजिक कार्यों को याद किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रद्धा, संवेदना और सेवा भावना का वातावरण बना रहा।
इस अवसर पर बलमिंदर, रमेश कुमार, शनी कुमार, मजनू, खुशीराम, रागिनी, सत्यावती, प्रियंका चौधरी, कोमल, कल्पना, स्वर्णिमा, श्रेष्ठ, जितेंद्र, शिवम, अमरजीत, अजीत, सुरजीत, अनुज, मालती, अंकित, जवाहरलाल, कैलाशा, शिवकुमारी, हीरालाल यादव, निर्मला, कवुतरा, फूलपता कोयला, रामनिवास, कांता, वंदना, संजू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता और श्रद्धालु मौजूद रहे।
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जब समाज के समर्थ लोग आगे आते हैं, तो सर्दी का सितम भी इंसानियत की गर्माहट के आगे कम पड़ जाता है।
