प्रभु श्रीराम त्याग, मर्यादा और आदर्श जीवन के प्रतीक : राजन जी महाराज

उत्तर प्रदेश गोंडा
प्रभु श्रीराम त्याग, मर्यादा और आदर्श जीवन के प्रतीक : राजन जी महाराज
समय माता मंदिर परिसर में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, राम-केवट प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
पूर्व सांसद नेता जी बृजभूषण सिंह, विधायक प्रेमनारायण पांडे, एमएलसी अवधेश कुमार सिंह, सपा नेता सूरज सिंह सांसद प्रतिनिधि संजीव सिंह ने किया रामकथा का रसपान
ब्लॉक प्रमुख भवानी भीख शुक्ल समेत सभी गणमान्य जनो ने उतारी श्रीराम दरबार की आरती
प्रदीप मिश्रा, प्रमुख संवाददाता

Gonda News

कटरा बाजार, गोंडा।
कटरा बाजार क्षेत्र के पेड़ीबरा गांव स्थित समय माता मंदिर परिसर में चल रही नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के सातवें दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास पूज्य राजन जी महाराज ने भगवान श्रीराम के वनगमन, त्याग, मर्यादा और केवट प्रसंग का ऐसा भावपूर्ण वर्णन किया कि कथा पंडाल में उपस्थित हजारों श्रद्धालु भक्ति रस में डूब गए। पूरा वातावरण “जय श्रीराम” और “सियाराम मय सब जग जानी” के उद्घोष से गूंज उठा।
राजन जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम केवल एक धार्मिक चरित्र नहीं, बल्कि आदर्श जीवन, कर्तव्यनिष्ठा, त्याग और मर्यादा के सर्वोच्च प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि जब महाराज दशरथ ने राम के राज्याभिषेक की घोषणा की, तभी मंथरा के बहकावे में आकर कैकेयी ने अपने दो वरदान मांग लिए। एक वरदान में भरत को राजगद्दी और दूसरे में श्रीराम के लिए चौदह वर्ष का वनवास मांगा गया।
महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम ने इस निर्णय को बिना किसी विरोध और दुख के सहज भाव से स्वीकार कर लिया। यही उनकी महानता है कि उन्होंने पिता की आज्ञा और परिवार की मर्यादा को सर्वोपरि माना। उन्होंने कहा कि आज के समाज में यदि लोग श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में उतार लें, तो परिवार और समाज दोनों में सुख, शांति और सद्भाव स्थापित हो सकता है।
कथा के दौरान जब राजन जी महाराज ने श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के अयोध्या से वनगमन का प्रसंग सुनाया तो श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा कि उस समय पूरी अयोध्या अपने प्रिय राम के पीछे चल पड़ी थी। यह केवल एक राजा का वनवास नहीं, बल्कि सत्य और धर्म की रक्षा के लिए दिया गया सर्वोच्च त्याग था।
इसके बाद कथा व्यास ने केवट प्रसंग का अत्यंत भावुक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब भगवान श्रीराम गंगा तट पर पहुंचे और केवट से नाव मांगी, तब केवट ने विनम्रता पूर्वक कहा कि प्रभु के चरणों की धूल में इतना प्रभाव है कि पत्थर भी नारी बन गया, यदि मेरी नाव भी स्त्री बन गई तो मेरा परिवार कैसे चलेगा। महाराज ने कहा कि यह प्रसंग भगवान और भक्त के बीच प्रेम, समर्पण और निष्कपट भक्ति का सर्वोत्तम उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि भगवान को धन, वैभव या दिखावा नहीं, बल्कि सच्चा प्रेम प्रिय होता है। केवट के पास न धन था, न कोई बड़ा ज्ञान, लेकिन उसकी निष्कलंक भक्ति ने भगवान श्रीराम को भी भावविभोर कर दिया। कथा में “उतराई” प्रसंग का भी अत्यंत मार्मिक वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावुक हो उठे।
कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। आज की कथा में मुख्य रूप से गोरखपुर तिवारी हाता से पंडित विनय शंकर तिवारी, भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद मा. रेखा अरुण वर्मा, उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री पवन पाण्डेय, मा. विनय कुमार दुबे, विधायक पलटू राम, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता सूरज सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने कथा व्यास का आशीर्वाद प्राप्त किया और आयोजन समिति की सराहना की।
कार्यक्रम में पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह, अयोध्या महापौर गिरिशपति त्रिपाठी, एमएलसी अवधेश सिंह, विधायक प्रेम नारायण पाण्डेय, विधायक प्रभात वर्मा, पूर्व आईपीएस जुगुल किशोर त्रिपाठी, भवानी भीख शुक्ल, कृष्ण भगवान शुक्ल, उमेश तिवारी, जिला कार्यवाह अश्वनी, सुनील सिंह, संजीव सिंह सहित क्षेत्र के हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे। कथा स्थल पर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुपम वातावरण बना रहा।

 

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