गोंडा में स्टीम/एसईएल आधारित शिक्षण का बढ़ा दायरा, दो दिवसीय प्रशिक्षण में मुख्य सेविकाओं को मिला व्यवहारिक ज्ञान
जिला कार्यक्रम अधिकारी संजय कुमार की अध्यक्षता में आयोजित हुआ कार्यक्रम
प्रदीप मिश्रा, प्रमुख संवाददाता

Gonda News
गोंडा। जनपद में प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत बाल विकास विभाग, यूनिसेफ एवं विक्रमशिला एजुकेशन रिसोर्स सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का मंगलवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य आंगनबाड़ी सेवाओं को सशक्त करते हुए बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए नवीन शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा देना रहा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम दो बैचों में संचालित किया गया। प्रथम बैच का आयोजन प्रातः 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक तथा द्वितीय बैच का आयोजन दोपहर 1 बजे से सायं 5 बजे तक किया गया। पहले बैच में 44 और दूसरे बैच में 42 मुख्य सेविकाओं ने सक्रिय सहभागिता करते हुए प्रशिक्षण प्राप्त किया।
प्रशिक्षण सत्रों में मुख्य सेविकाओं को सहयोगात्मक पर्यवेक्षण की अवधारणा के साथ नई शिक्षा नीति के अनुरूप स्टीम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियंत्रण, कला एवं गणित) एवं एसईएल (सामाजिक एवं भावनात्मक अधिगम) आधारित शिक्षण विधियों की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने बताया कि खेल आधारित शिक्षण पद्धति बच्चों के सीखने को सरल, रोचक और प्रभावी बनाती है, जिससे उनका बौद्धिक, सामाजिक एवं भावनात्मक विकास संतुलित रूप से संभव हो पाता है।
विक्रमशिला संस्था के प्रशिक्षक विजय मिश्रा, इन्द्रभान तिवारी एवं कृष्ण मोहन सिंह ने विभिन्न गतिविधियों और प्रयोगों के माध्यम से प्रतिभागियों को व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया। समूह गतिविधियों और सहभागिता आधारित अभ्यासों के जरिए विज्ञान एवं तकनीकी के मूलभूत सिद्धांतों को सहज तरीके से समझाया गया।
जिला कार्यक्रम अधिकारी ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र पर स्टीम और एसईएल आधारित शिक्षण को लागू करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने मुख्य सेविकाओं को निर्देशित किया कि वे प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान को जमीनी स्तर पर लागू करते हुए बच्चों के समग्र विकास को सुनिश्चित करें।
जिला समन्वयक (पोषण अभियान) राजकुमार ने सहयोगात्मक पर्यवेक्षण की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए इसके प्रभावी क्रियान्वयन के तरीकों की जानकारी दी। प्रशिक्षण के दूसरे दिन भी दोनों पालियों में सघन सत्र आयोजित किए गए, जिसमें मंडलीय पदाधिकारी कृष्ण मोहन सिंह एवं जिला समन्वयक इन्द्रभान ने प्रतिभागियों को विषय की गहन समझ विकसित कराई।
समापन अवसर पर प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें आधुनिक शिक्षण तकनीकों को अपनाने की नई दिशा मिली है। आयोजकों ने विश्वास जताया कि इस पहल का सकारात्मक प्रभाव जल्द ही जनपद के आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यप्रणाली में दिखाई देगा। गोंडा। डीपीओ कार्यालय में आयोजित मुख्य सेविकाओं के दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाली पर्यवेक्षिकाओं के नाम बैचवार इस प्रकार हैं—
प्रथम बैच में बभनजोत से सोनम, आरती देवी, निधि पाण्डेय, प्रियंका, रुचि, कुमारी प्रीति भारती व सरोज सिंह; छपिया से मीनाक्षी सोनी, अनुपम मिश्रा, रंजना सिंह व इन्द्रावती; कर्नलगंज से कलावती, दुर्गेश कुमारी, नीलम सिंह, विभा वर्मा व रीता यादव; कटरा बाजार से इबरत बेगम, मंजू मौर्या, निधि वर्मा, गरिमा त्रिपाठी व पुष्पा देवी; नवाबगंज से मीना उपाध्याय, मिताली सिंह, दिपाली सिंह, मोहिनी मौर्या, ज्योति सिंह, प्रीति सिंह, रुपईडीह से सुमिता वर्मा, सुषमा, सरिता देवी, किरण देवी, प्रतिभा सिंह, नीलू व दीपाली मिश्रा; वजीरगंज से बबली रावत, रेखा मौर्या, ज्योत्सना, संयोगिता यादव व सुप्रिया; तथा मनकापुर से ललित कुमारी, शमा परवीन, मानसी शुक्ला, सुनीता सिंह व निशि द्विवेदी शामिल रहीं।
द्वितीय बैच में बेलसर से प्रज्ञा दुबे, सरिता पासवान व कोमल श्रीवास्तव; नगर परियोजना से दिव्या पाठक, अंशुमा तिवारी, नेहा परवीन, शिवांगी, मोनिका नायक व सुशीला सिंह; हलधरमऊ से शाइली, मनीषा अवस्थी, उपासना तिवारी, रचना देसवाल व सुषमा; इटियाथोक से शिवानी साहू, ज्योति वर्मा, दीपा यादव व हेमलता तिवारी; झंझरी से तस्मिया, प्रीति पाण्डेय, रीना देवी, शकुंतला देवी, सोनी तिवारी व कुमारी सरिता; मुजेहना से नम्रता शुक्ला, दीपिका पाण्डेय, पिंकी सिंह, रेखा, अंकिता श्रीवास्तव व गरिमा राजन; पंडरी कृपाल से प्रियंका वर्मा, गीता विश्वकर्मा, प्रियंका मिश्रा व लक्ष्मी यादव; परसपुर से आरती गौतम, साधना साहू, तृप्ति पाण्डेय, प्रियंका भारती व सुमन गौतम; तथा तरबगंज से प्रीति आनंद, रिम्पी सिंह व उर्मिला देवी शामिल रहीं।
