यूएस ईरान युद्ध की तपिश में झुलस रहे जिले के गेहूं किसान

उत्तर प्रदेश गोंडा
लगभग ठप पड़ गई है सरकारी गेहूं की खरीद
अब कोटेदारों से बटोरे जा रहे हैं बोरे उसी में होगी खरीद
590 गांठ बोरों को कोटेदारों से लिया जाना है जिसमें से अबतक 90 गांठ बोरे ही से लिए जा सके हैं वापस
जूट के पुराने बोरों में गेहूं खऱीदने का भी शासन ने दिया निर्देश
पांच लाख कुंतल गेहूं खरीदने का गोंडा जिले को मिला हुआ है लक्ष्य
सरकारी गेहूं खरीद में पड़ा बोरों की कमी से रोड़ा
यूएस–ईरान तनाव का असर: बोरों की कमी से गोंडा में गेहूं खरीद ठप, किसान परेशान
प्रदीप मिश्रा, प्रमुख संवाददाता

Gonda News

गोंडा। अंतरराष्ट्रीय हालात का असर अब जिले के किसानों पर भी साफ दिखने लगा है। यूएस और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते प्लास्टिक के कच्चे माल की सप्लाई प्रभावित होने से गोंडा जिले में सरकारी गेहूं खरीद व्यवस्था लगभग ठप पड़ गई है। बोरों की भारी कमी के कारण खरीद केंद्रों पर किसानों को वापस लौटना पड़ रहा है, जिससे उनकी चिंता बढ़ती जा रही है।
जिले को इस वर्ष करीब 5 लाख कुंतल गेहूं खरीद का लक्ष्य मिला है, लेकिन बोरों की कमी इस लक्ष्य के सामने बड़ी बाधा बनकर खड़ी हो गई है। हालात यह हैं कि खरीद केंद्रों पर पर्याप्त बोरे उपलब्ध नहीं हैं, जिसके चलते गेहूं खरीद की प्रक्रिया सुस्त पड़ गई है।

स्थिति को संभालने के लिए अब प्रशासन ने कोटेदारों से पुराने बोरे जुटाने की व्यवस्था शुरू की है। जिले में कुल 590 गांठ बोरे कोटेदारों से लिए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन अब तक मात्र 90 गांठ बोरे ही वापस मिल पाए हैं। इससे स्पष्ट है कि वैकल्पिक व्यवस्था भी अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रही है।

शासन स्तर से निर्देश जारी किए गए हैं कि जूट के पुराने बोरों में भी गेहूं की खरीद की जाए। हालांकि, जूट के बोरों की भी देशभर में कमी बनी हुई है। बताया जा रहा है कि जूट की आपूर्ति मुख्यतः बांग्लादेश से होती है और वहां से सप्लाई पहले से ही प्रभावित है। इसका असर पिछले धान खरीद सत्र में भी देखने को मिला था।
प्लास्टिक के कच्चे माल की सप्लाई प्रभावित
जानकारी के अनुसार, प्लास्टिक के बोरे बनाने में उपयोग होने वाले दाने (ग्रेन्यूल्स) का बड़ा हिस्सा ईरान से आयात होता है। यूएस–ईरान के बीच चल रहे तनाव के कारण इन कच्चे माल की सप्लाई बाधित हो गई है, जिससे प्लास्टिक के बोरे तैयार नहीं हो पा रहे हैं। यही वजह है कि गेहूं खरीद व्यवस्था पर सीधा असर पड़ा है।
खरीद केंद्रों पर पहुंच रहे किसानों को बोरों की कमी के चलते घंटों इंतजार करना पड़ रहा है या फिर बिना गेहूं बेचे ही वापस लौटना पड़ रहा है। इससे किसानों में नाराजगी भी बढ़ रही है। कई किसान निजी व्यापारियों को औने-पौने दाम पर गेहूं बेचने को मजबूर हो सकते हैं।

जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी एन.के. पाठक ने बताया कि,
“अभी तौल चल रही है। उतने बोरे हैं। कटाई भी पूरी नहीं हुई है
आरएफसी कार्यालय स्तर पर यूज्ड बोरे का टेंडर भी जारी हो गया है।अब बोरे की कमी पूरी हो जाएगी । ये अलग बात है कि बोरों की कमी एक बड़ी समस्या बनकर सामने आई है, लेकिन विभाग वैकल्पिक व्यवस्था में जुटा हुआ है। कोटेदारों से बोरे एकत्र किए जा रहे हैं और जूट के पुराने बोरों के उपयोग के निर्देश भी दिए गए हैं। जल्द ही स्थिति को सामान्य करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।”

 

जिस प्लास्टिक से बोरे बनते हैं वो प्लास्टिक बनाने के लिए प्लास्टिक के दाने ईरान से मंगाये जाते हैं, यूएस और ईरान के बीच चल रही ज़ंग में अब प्लास्टिक के बोरे बनाने के लिए मंगाये जाने वाले प्लास्टिक के दाने ईरान से आने बंद हो गए हैं, ऐसे में प्लास्टिक के बोरों में होने वाली खरीद बोरों की कमी से ठप पड़ गई है। जूट के बोरों की कमी देश में पहले से ही है क्योंकि बांग्लादेश से जूट मंगाया जाता है, बांग्लादेश से इसकी सप्लाई पहले से ही प्रभावित है, जिसका असर धान खरीद सीजन में पहले से ही पड़ा हुआ था

जिला पूर्ति अधिकारी दिनेश प्रताप सिंह ने बताया कि कोटेदारों से उनके खाली बोरे वापस मंगाए जा रहे हैं, इसकी वे खुद समीक्षा कर रहे हैं।

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