बाल वाटिका से मजबूत होगी नौनिहालों की बुनियाद, ईसीसीई एजुकेटरों की दो दिवसीय ट्रेनिंग शुरू
दीप प्रज्वलित कर बीएसए अमित कुमार सिंह ने किया शुभारंभ, खेल और गतिविधियों के जरिए बच्चों को सिखाने पर जोर
प्रदीप मिश्रा, प्रमुख संवाददाता

Gonda News
गोंडा। नौनिहालों की शुरुआती शिक्षा को मजबूत आधार देने के लिए ईसीसीई बाल वाटिका (फेज-3) के तहत ईसीसीई एजुकेटरों की दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू हुआ। जिला परियोजना कार्यालय में गुरुवार को आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह और सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी सुदीप पांडेय ने दीप प्रज्वलित कर तथा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। मां सरस्वती की वंदना के साथ शुरू हुए प्रशिक्षण में एजुकेटरों को पांच से छह वर्ष की आयु के बच्चों की जरूरतों के अनुरूप खेल, गतिविधि और अनुभव आधारित शिक्षण की बारीकियां बताई गईं।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य बाल वाटिका में पढ़ने वाले बच्चों को कक्षा एक की औपचारिक शिक्षा के लिए सहज रूप से तैयार करना है। प्रशिक्षण में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि इस उम्र के बच्चों पर पढ़ाई का बोझ डालने के बजाय खेल, कहानी, कविता, चित्र, अभिनय, कला और दैनिक जीवन से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर दिया जाए। एजुकेटरों को बताया गया कि बच्चे जितना सक्रिय होकर सीखेंगे, उनकी भाषा, संख्या ज्ञान, तर्क क्षमता और रचनात्मकता का विकास उतना ही बेहतर होगा।
‘चहक’, ‘कदम’ और ‘कलांकुर’ के उपयोग का कराया अभ्यास
प्रशिक्षण के दौरान राज्य स्तर से विकसित शिक्षण सामग्री के प्रभावी प्रयोग की जानकारी दी जा रही है। ‘चहक’ कार्यपुस्तिका के माध्यम से बच्चों में प्रारंभिक भाषा ज्ञान और साक्षरता विकसित करने की गतिविधियों का अभ्यास कराया गया। वहीं ‘कदम’ के जरिए संख्या बोध, गणितीय समझ और तार्किक क्षमता को गतिविधियों के माध्यम से विकसित करने की विधियां बताई गईं। ‘कलांकुर’ कला पुस्तिका के माध्यम से बच्चों की कल्पनाशक्ति, अभिव्यक्ति और रचनात्मक क्षमता को उभारने वाली गतिविधियों पर भी प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षकों ने कहा कि बाल वाटिका में प्रत्येक गतिविधि को सीखने के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। बच्चों की जिज्ञासा को रोकने के बजाय उसे सही दिशा देना जरूरी है। उनकी रुचि और सीखने की गति के अनुसार गतिविधियां कराने से बच्चों में सीखने के प्रति स्वाभाविक उत्सुकता विकसित होगी।
कक्षा एक में प्रवेश से पहले तैयार होंगे बच्चे
ईसीसीई प्रशिक्षण में पांच से छह वर्ष के बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है। भाषा और संख्या ज्ञान के साथ बच्चों के शारीरिक समन्वय, सामाजिक व्यवहार, भावनात्मक विकास, कल्पनाशीलता और रचनात्मक अभिव्यक्ति को भी सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा बनाने की जानकारी दी गई।
अधिकारियों ने कहा कि बाल वाटिका की सफलता केवल शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराने से नहीं, बल्कि उसके बाल-केंद्रित और प्रभावी प्रयोग से होगी। एजुकेटरों को प्रशिक्षण में सीखी गई गतिविधियों को बच्चों की जरूरत और स्थानीय परिवेश के अनुसार लागू करने के लिए प्रेरित किया गया।

22 सितंबर से चल रहा प्रशिक्षण का क्रम
ईसीसीई बाल वाटिका (फेज-3) प्रशिक्षण की शुरुआत जिले में 22 सितंबर से हुई थी। पहले चरण में नोडल एआरपी और नोडल संकुल शिक्षकों को तीन-तीन दिवस के दो बैच में प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद अब एक अक्टूबर से ईसीसीई एजुकेटरों की दो दिवसीय ट्रेनिंग शुरू की गई है।
प्रशिक्षण में नोडल एआरपी ऋचा सिंह, नोडल प्रवक्ता मोहम्मद शरीफ, नोडल शिक्षण संकुल पप्पू निषाद तथा नोडल एसआरजी विनीता कुशवाहा द्वारा विभिन्न गतिविधियों और शिक्षण विधियों का अभ्यास कराया जा रहा है। कार्यक्रम में डीसी निपुण हरिश्चंद्र, डीसी प्रशिक्षण सूर्यमणि त्रिपाठी, डीसी सामुदायिक प्रेम शंकर समेत विभागीय अधिकारी और प्रशिक्षण से जुड़े कर्मचारी मौजूद रहे।
अधिकारियों का कहना है कि बाल वाटिका बच्चों की औपचारिक शिक्षा की पहली मजबूत सीढ़ी है। यहां सीखने का वातावरण जितना सहज और आनंददायी होगा, बच्चे कक्षा एक में प्रवेश के बाद उतनी ही आसानी से विद्यालयी शिक्षा से जुड़ सकेंगे।

प्रदीप मिश्रा, प्रमुख संवाददाता 9415120996