जेल की चहारदीवारी में कैद बचपन, पहनने के नए पोशाक पाकर खिले मासूमों के चेहरे
महिला बंदियों के साथ बच्चों से भी मिलीं समाजसेविका व अधिवक्ता रुचि मोदी, सकारात्मक बदलाव के लिए किया प्रेरित
प्रदीप मिश्रा, प्रमुख संवाददाता
Gonda News
गोण्डा। मंडल कारागार की ऊंची चहारदीवारी के भीतर कुछ ऐसे मासूमों का बचपन बीत रहा है, जिनका कोई गुनाह नहीं है। मां के साथ जेल में रह रहे इन बच्चों की दुनिया फिलहाल सलाखों के साये तक सिमटी हुई है। ऐसे में उनके बीच पहुंचकर प्यार, दुलार और अपनत्व के कुछ पल साझा करना उनके लिए खुशियों की छोटी-सी सौगात बन गया। शुक्रवार को समाजसेविका एवं अधिवक्ता रुचि मोदी मंडल कारागार पहुंचीं और वहां रह रहे तीन वर्षीय दो बालिकाओं व एक बालक से मुलाकात की। उन्होंने बच्चों को पोशाक भेंट की और उनके चेहरों पर मुस्कान लाने का प्रयास किया।
रुचि मोदी ने जेल भ्रमण के दौरान महिला बंदियों से भी बातचीत की। उन्होंने उन्हें जीवन में सुधार लाने, सकारात्मक सोच अपनाने और अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, जीवन में बदलाव और सुधार की संभावनाएं हमेशा बनी रहती हैं। सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने का प्रयास व्यक्ति के जीवन को नई दिशा दे सकता है।
इस दौरान बच्चों के प्रति संवेदनशीलता बरतने और उनके बेहतर भविष्य के महत्व पर भी जोर दिया गया। मां के साथ जेल में रह रहे इन मासूमों को विशेष देखभाल, स्नेह और प्रोत्साहन की आवश्यकता है। ऐसे बच्चों के लिए छोटी-सी पहल भी उनके जीवन में खुशी के पल जोड़ सकती है।
कार्यक्रम के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) की सचिव अंकिता सिंह भी मौजूद रहीं। जेल प्रशासन ने रुचि मोदी की इस पहल की सराहना की। जेलर आफताब अहमद तिवारी ने बच्चों को पोशाक भेंट करने और महिला बंदियों को सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करने के प्रयास पर आभार जताया।
जेल की चहारदीवारी के भीतर बच्चों के साथ बिताए गए ये पल उनके लिए खुशियों की सौगात बनकर आए। रुचि मोदी की इस पहल को मानवीय संवेदना और सामाजिक सरोकार से जुड़ा प्रयास माना जा रहा है।