टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ गोंडा में शिक्षकों का शक्ति प्रदर्शन, केंद्र से अध्यादेश लाकर राहत देने की मांग
प्रदीप मिश्रा, प्रमुख संवाददाता

Gonda News
गोंडा, 13 अप्रैल।
टीईटी अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों का विरोध अब तेज होता नजर आ रहा है। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ, जनपद-गोंडा के बैनर तले सोमवार को हजारों शिक्षकों ने बीएसए कार्यालय से जिलाधिकारी कार्यालय तक विशाल मार्च निकालकर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा। शिक्षकों ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से मुक्त करने की मांग उठाई।
महासंघ द्वारा दिए गए ज्ञापन में कहा गया कि केंद्र और राज्य सरकारें समय-समय पर निर्धारित शैक्षिक एवं प्रशिक्षण योग्यताओं के आधार पर शिक्षकों की नियुक्तियां करती रही हैं। ऐसे में पूर्व में नियुक्त सभी शिक्षकों ने उस समय लागू नियमों के अनुरूप अपनी योग्यता पूरी की थी, इसलिए अब उन पर टीईटी की अनिवार्यता थोपना न्यायसंगत नहीं है।
शिक्षकों ने अपने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया कि 23 अगस्त 2010 को केंद्र सरकार द्वारा जारी राजपत्र में भविष्य की भर्तियों के लिए टीईटी अनिवार्य किया गया था, जबकि पहले से नियुक्त शिक्षकों को इससे छूट दी गई थी। विभिन्न राज्यों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम अलग-अलग तिथियों में लागू हुआ, जैसे उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से इसे प्रभावी किया गया। ऐसे में इन तिथियों से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त रखा जाना चाहिए।
महासंघ ने उच्चतम न्यायालय के 1 सितंबर 2025 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि अब इस निर्णय के चलते पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए भी टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य हो गया है, जिससे व्यवहारिक कठिनाइयां उत्पन्न हो रही हैं। संगठन ने केंद्र सरकार से मांग की कि इस स्थिति को देखते हुए अध्यादेश लाकर शिक्षकों को राहत दी जाए।
शिक्षक संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि दो वर्ष के भीतर अथवा 1 सितंबर 2027 तक टीईटी उत्तीर्ण न करने वाले शिक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का आदेश लागू किया गया, तो देशभर में लगभग 25 लाख शिक्षक प्रभावित होंगे। इससे उनके परिवारों पर भी गंभीर आर्थिक संकट आ सकता है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि शिक्षक देश की शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं और उनके हितों की अनदेखी उचित नहीं है। समय रहते सकारात्मक निर्णय न होने पर व्यापक आंदोलन की चेतावनी भी दी गई।
इस दौरान शरद सिंह, सतीश पाण्डेय, अनूप सिंह, किरण सिंह, अमर यादव, रणजीत सिंह, अनिल सिंह, उमेश मिश्रा, मुशीर सिद्दीकी और अवधेश मणि सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं पदाधिकारी मौजूद