मिट्टी से गढ़ीं मां दुर्गा की प्रतिमाएं, बच्चों ने दिखाई रचनात्मक प्रतिभा
कंपोजिट विद्यालय सोनबरसा बक्सरा में माटी कला कार्यशाला एवं प्रदर्शनी का आयोजन, करीब 50 विद्यार्थियों ने बनाई नौ देवियों की झलक
प्रदीप मिश्रा, प्रमुख संवाददाता
Gonda News
गोण्डा। नवरात्रि और दुर्गा पूजा के पावन अवसर पर कंपोजिट विद्यालय सोनबरसा बक्सरा, आज्ञाराम, मनकापुर में माटी कला कार्यशाला एवं प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। *‘माटी को बनाया सोना’* की संकल्पना पर आधारित इस आयोजन में विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाशीलता, कलात्मक कौशल और सृजनात्मक प्रतिभा का परिचय देते हुए मां दुर्गा की सुंदर प्रतिमाएं बनाईं। करीब 50 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया और मिट्टी से तैयार अपनी कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई।
कार्यशाला में विद्यार्थियों ने गीली मिट्टी के साथ पुआल, सींक, तार, कागज, पत्तियों और लकड़ी की डंडियों का संयोजन कर आकर्षक एवं टिकाऊ प्रतिमाएं तैयार कीं। बच्चों ने अपनी कला के माध्यम से मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों को उकेरने का प्रयास किया। उनके हाथों से बनी प्रतिमाओं ने प्रदर्शनी को विशेष आकर्षण प्रदान किया। शिक्षकों ने बच्चों की मेहनत, कल्पनाशीलता और कलात्मक अभिव्यक्ति की सराहना की।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षक बलजीत सिंह कनौजिया ने विद्यार्थियों को नवरात्रि की नौ देवियों—शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री—के स्वरूप एवं धार्मिक महत्व की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि नारी शक्ति, साहस, आत्मविश्वास और सृजन का प्रतीक है। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और परंपराओं को समझने के साथ ही अपनी रचनात्मक क्षमता विकसित करने का अवसर मिलता है।
कार्यशाला में शिक्षक आलोक कुमार, अरुण कुमार सिंह, पूनम वर्मा, सुरेश कुमार, चित्रावती, अनुराधा मिश्रा और पूनम यादव ने सुगमकर्ता के रूप में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने बच्चों को प्रतिमाओं का आकार देने, मिट्टी को व्यवस्थित करने और उपलब्ध प्राकृतिक सामग्रियों का बेहतर उपयोग करने में सहयोग दिया।
कार्यक्रम में राजकुमार, अजय, धर्मेंद्र, करना, रीतेश, आशीष, विनोद, रीतिका, प्रियांशु, अंशू, गायत्री, माधुरी, अंकित, अंजली, करिशमा, शिवांशु, निधि, मुस्कान, चांदनी, राज बाबू, कुसुम, संजय, अम्रेश और जितेंद्र सहित अन्य विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया।
माटी कला कार्यशाला ने विद्यार्थियों को अपनी कल्पना को साकार करने, स्थानीय संसाधनों का रचनात्मक उपयोग सीखने और भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर दिया। प्रदर्शनी में सजी प्रतिमाएं इस बात का प्रमाण बनीं कि उचित मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर बच्चे साधारण मिट्टी को भी कला की अनूठी कृति में बदल सकते हैं।

