मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता जरूरी, विद्यार्थियों ने लघु नाटिका से दिया तनाव प्रबंधन का संदेश
प्रधानाचार्य ने स्क्रीन के बढ़ते उपयोग के दुष्प्रभावों पर किया सचेत, व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में संतुलन बनाए रखने पर दिया जोर
प्रदीप मिश्रा, प्रमुख संवाददाता
Gonda News
गोण्डा। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर 10 अक्टूबर को स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, गोण्डा में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पैराचिकित्सा एवं नर्सिंग के स्टूडेंट्स ने लघु नाटिका के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, तनाव प्रबंधन और मानसिक समस्याओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का संदेश दिया। इस दौरान मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के उपायों पर चर्चा की गई और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में चिकित्सा महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमार वर्मा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, चिकित्सा अधीक्षक, मनोचिकित्सा विभाग की अध्यक्ष डॉ. नूपुर पॉल, वरिष्ठ आवासीय चिकित्सक डॉ. अज़हर, चिकित्सालय प्रशासन के आवासीय चिकित्सक, मनोचिकित्सा विभाग के चिकित्सक तथा असंचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम से जुड़े कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान पैराचिकित्सा एवं नर्सिंग के स्टूडेंट्स ने लघु नाटिका प्रस्तुत कर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा। प्रस्तुति के माध्यम से तनाव के कारणों को समझने, चिंता की स्थिति में उचित कदम उठाने और मानसिक परेशानियों को छिपाने के बजाय उनके प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया गया। स्टूडेंट्स ने अपनी प्रस्तुति से यह भी समझाया कि मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते उचित सहायता लेना आवश्यक है।
तनाव प्रबंधन और जीवन में संतुलन पर जोर
इस अवसर पर प्रधानाचार्य प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमार वर्मा ने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से तनाव को संतुलित रखने, चिंता का प्रबंधन करने तथा व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में व्यस्त दिनचर्या और विभिन्न जिम्मेदारियों के कारण मानसिक तनाव बढ़ सकता है। ऐसे में अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित रखने, सकारात्मक सोच अपनाने और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है।
स्टूडेंट्स के स्क्रीन उपयोग को संतुलित रखना जरूरी
प्रधानाचार्य ने स्टूडेंट्स में बढ़ते स्क्रीन उपयोग के दुष्प्रभावों पर भी चर्चा की। उन्होंने मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के संतुलित उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि पढ़ाई के साथ शारीरिक गतिविधियों, खेलकूद, पर्याप्त विश्राम और परिवार के साथ संवाद के लिए भी समय निकालना चाहिए। स्क्रीन पर अत्यधिक समय बिताने से दिनचर्या प्रभावित हो सकती है, इसलिए तकनीक का उपयोग आवश्यकता और निर्धारित समय के अनुसार करना जरूरी है।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, मानसिक समस्याओं से जुड़ी झिझक को दूर करना तथा तनाव और चिंता के प्रभावी प्रबंधन के प्रति लोगों को प्रेरित करना रहा। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। समय रहते मानसिक परेशानियों को पहचानना, सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों से परामर्श लेना स्वस्थ एवं संतुलित जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।