अक्षय तृतीया पर बाल विवाह के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’, प्रशासन और अपराजिता ने कसी कमर
प्रदीप मिश्रा, प्रमुख संवाददाता

Gonda News :
गोण्डा। अक्षय तृतीया जैसे शुभ अवसर पर बाल विवाह की संभावनाओं को पूरी तरह समाप्त करने के उद्देश्य से अपराजिता सामाजिक समिति और जिला प्रशासन ने संयुक्त रूप से ‘सतर्कता दिवस’ मनाया। बाल विवाह निषेध अधिकारी (सीएमपीओ) की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में स्पष्ट संदेश दिया गया कि जिले में इस दिन एक भी बाल विवाह नहीं होने दिया जाएगा।
बैठक के दौरान विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां विशेष निगरानी रखने तथा किसी भी सूचना पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने की रणनीति तैयार की गई। अधिकारियों ने कहा कि बाल विवाह की सूचना मिलने पर तत्काल हस्तक्षेप कर उसे रोका जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अपराजिता सामाजिक समिति द्वारा लंबे समय से पंचायतों, विद्यालयों, धर्मगुरुओं और समुदाय के सहयोग से बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। संस्था ने अब तक हजारों लोगों को बाल विवाह न करने और इसकी सूचना देने की शपथ दिलाई है। यह संस्था ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ नेटवर्क के साथ मिलकर देशभर के 450 से अधिक जिलों में अभियान चला रही है और अब तक 5 लाख से अधिक बाल विवाह रोकने में सफलता प्राप्त कर चुकी है।
अपराजिता की निदेशक किरण बैस ने कहा कि अक्षय तृतीया जैसे पावन अवसर की आड़ में बाल विवाह जैसे अपराध को किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि प्रशासन और समाज के संयुक्त प्रयासों से ऐसी घटनाओं में कमी आई है, लेकिन इसे पूरी तरह समाप्त करना अभी भी आवश्यक है।
उन्होंने यह भी बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (PCMA), 2006 के तहत नाबालिगों की शादी कराना दंडनीय अपराध है, जिसमें दोषी को दो वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
बैठक में एएचटीयू से थाना प्रभारी लाल बिहारी अपनी टीम के साथ उपस्थित रहे। इसके अलावा प्रोटेक्शन ऑफिसर चन्द्रमोहन वर्मा, वन स्टॉप सेंटर की मैनेजर चेतना सिंह, डीएचईडब्ल्यू टीम, चाइल्ड हेल्पलाइन टीम तथा अपराजिता सामाजिक समिति के सदस्य भी मौजूद रहे। सभी ने जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प दोहराते हुए विशेष निगरानी और त्वरित हस्तक्षेप की रणनीति पर सहमति जताई।