भरत मिलाप चौराहे पर आरंभ हुई श्रीमद् भागवत कथा: भक्ति
ज्ञान और वैराग्य के अमृतमयी रस से सराबोर हुआ प्रथम दिवस
प्रदीप मिश्रा, प्रमुख संवाददाता

Gonda News
गोंडा। नगर के भरत मिलाप चौराहे के पास स्थित स्वर्ण गंगा ज्वेलर्स परिसर में मंगलवार की शाम श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का अनूठा संगम देखने को मिला। यहां सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा अनुष्ठान का शुभारंभ विधि-विधान के साथ हुआ। कथा प्रारंभ होते ही पूरा परिसर भजन, कीर्तन और हरे रामा–हरे कृष्णा के मधुर जयघोषों से गुंजायमान हो उठा।
कथा के प्रथम दिवस पंचवटी श्री सीताराम आश्रम ऋषिभूमि से पधारे प्रसिद्ध कथा वाचक रवि शंकर गुरु भाई ने भागवत महापुराण के माहात्म्य का अत्यंत हृदयस्पर्शी और सारगर्भित वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भागवत कथा केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करने वाली अद्वितीय आध्यात्मिक धरोहर है।
कथावाचक ने भक्ति माता की उत्पत्ति, उनके रूपों और उनकी करुणा का अद्भुत चित्रण किया। उन्होंने ज्ञान और वैराग्य के वृद्ध होने और फिर भागवत श्रवण के प्रभाव से उनके युवा होने की कथा को इतनी भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया कि श्रोता भाव-विभोर हो उठे।
शुकदेव जी के प्राकट्य की कथा का वर्णन भी अत्यंत मनोहारी रहा। श्री गुरु भाई ने बताया कि कैसे शुकदेव जी जन्म से ही परब्रह्म स्वरूप थे और कैसे उन्होंने वैराग्य और आत्मज्ञान की राह को अपने जीवन का सार बनाया। कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालु ‘जय श्रीहरि’ के उद्घोष के साथ भावविभोर होकर झूमते दिखाई दिए।
कथा के समापन पर भव्य आरती का आयोजन हुआ, जिसमें भक्तों ने दीप प्रज्ज्वलित कर प्रभु के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की। इसके बाद सभी को प्रसाद वितरित किया गया, जिससे वातावरण और अधिक धार्मिक आस्था से भर उठा।
इस पावन अनुष्ठान में मुख्य यजमान हेमलता रस्तोगी एवं जमुना प्रसाद रस्तोगी रहे, जिन्होंने विधिवत पूजन-अर्चन कर कथा के सफल आयोजन हेतु मंगलकामनाएं कीं।
कथा आयोजन में सहयोग करने वालों में संजय रस्तोगी, राजीव रस्तोगी, शिवकुमार सोनी, सुधीर सोनी, रवि रस्तोगी, संतोष सोनी, अमित सोनी, रवि सोनी, संदीप मेहरोत्रा, अम्बरीष रस्तोगी, घनश्याम रस्तोगी, सोनिया रस्तोगी, सीमा सोनी, रंजन सोनी, काजल सोनी, आरती सोनी, अंजलि सोनी, पुष्पांजलि रस्तोगी समेत बड़ी संख्या में क्षेत्रीय भक्तगण शामिल रहे। सभी ने मिलकर कथा स्थल की सजावट, स्वागत व्यवस्था, भजन-कीर्तन और प्रसाद प्रबंधन की जिम्मेदारी बखूबी निभाई।