चिकित्सा शिक्षा में अनुशासन, संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों का विशेष महत्व : डॉ. संतोष कुमार वर्मा
नवप्रवेशित एमबीबीएस विद्यार्थियों को चिकित्सा महाविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, चिकित्सकीय कार्यप्रणाली और रैगिंग निषेध के नियमों की दी गई जानकारी
प्रदीप मिश्रा, प्रमुख संवाददाता

Gonda News
गोण्डा। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, गोण्डा में मंगलवार को प्रथम वर्ष के नवप्रवेशित एमबीबीएस विद्यार्थियों के लिए अभिविन्यास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। महाविद्यालय के व्याख्यान कक्ष संख्या एक में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानाचार्य प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमार वर्मा ने विद्यार्थियों को चिकित्सा शिक्षा की महत्ता, चिकित्सकीय पेशे की गरिमा, अनुशासन और मानवीय मूल्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एक कुशल चिकित्सक बनने के लिए केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि मरीजों के प्रति संवेदनशीलता, नैतिक आचरण, नियमित अध्ययन और सेवा भाव भी उतने ही आवश्यक हैं।
कार्यक्रम का उद्देश्य नवप्रवेशित विद्यार्थियों को महाविद्यालय की शैक्षणिक, प्रशासनिक और चिकित्सकीय कार्यप्रणाली से परिचित कराना तथा उन्हें नए शैक्षणिक वातावरण में सहज रूप से अध्ययन शुरू करने के लिए तैयार करना रहा। इस दौरान चिकित्सा शिक्षा से जुड़े वरिष्ठ संकाय सदस्य, वरिष्ठ एवं कनिष्ठ आवासीय चिकित्सक तथा महाविद्यालय के प्रशासनिक कर्मचारी उपस्थित रहे।
अनुशासन और नियमित अध्ययन से मिलेगी सफलता
प्रधानाचार्य डॉ. संतोष कुमार वर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा शिक्षा एक जिम्मेदारीपूर्ण और चुनौतीपूर्ण यात्रा है। इसमें सफलता प्राप्त करने के लिए नियमित अध्ययन, समय का सदुपयोग, कक्षाओं में सक्रिय सहभागिता और शिक्षकों के मार्गदर्शन का पालन करना आवश्यक है। विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई के साथ व्यक्तिगत जीवन में भी संतुलन बनाए रखना चाहिए, ताकि वे मानसिक रूप से स्वस्थ रहते हुए अपनी शैक्षणिक जिम्मेदारियों का बेहतर ढंग से निर्वहन कर सकें।
उन्होंने विद्यार्थियों को महाविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, विभिन्न विभागों की भूमिका और संबद्ध चिकित्सालय में मरीजों के उपचार से जुड़ी कार्यप्रणाली के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य ज्ञान और कौशल के साथ ऐसा दृष्टिकोण विकसित करना है, जिससे भविष्य में मरीजों को बेहतर उपचार और उचित परामर्श मिल सके।
मरीजों के प्रति संवेदनशीलता को बताया जरूरी
प्रधानाचार्य ने विद्यार्थियों को समझाया कि चिकित्सक का व्यवहार मरीज के उपचार और उसके विश्वास से गहराई से जुड़ा होता है। इसलिए प्रत्येक मरीज के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना, उसकी परेशानी को गंभीरता से सुनना, उसकी निजता बनाए रखना और उपचार संबंधी नैतिक नियमों का पालन करना आवश्यक है। उन्होंने टीम भावना, व्यावसायिक आचरण और मानवीय मूल्यों को चिकित्सा शिक्षा का अभिन्न अंग बताते हुए विद्यार्थियों को भविष्य में जिम्मेदार, संवेदनशील और कुशल चिकित्सक बनने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में निरंतर सीखने की प्रवृत्ति बनाए रखना जरूरी है। विद्यार्थियों को वरिष्ठ शिक्षकों के अनुभवों से सीखने, उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों का उपयोग करने और महाविद्यालय में होने वाली शैक्षणिक तथा सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
रैगिंग से दूर रहने और नियमों के पालन के निर्देश
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को छात्रावास में रहने से संबंधित नियमों और विनियमों की जानकारी दी गई। प्रधानाचार्य ने महाविद्यालय परिसर में अनुशासन बनाए रखने तथा रैगिंग जैसी प्रतिबंधित गतिविधियों से पूरी तरह दूर रहने के निर्देश दिए। उन्होंने रैगिंग निषेध संबंधी प्रावधानों, शिकायत निवारण व्यवस्था और विद्यार्थियों की सुरक्षा एवं कल्याण के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं के बारे में भी जानकारी दी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि महाविद्यालय में प्रत्येक विद्यार्थी को सुरक्षित, सम्मानजनक और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध होना चाहिए। विद्यार्थियों को किसी भी अनुचित गतिविधि में शामिल नहीं होना चाहिए और ऐसी स्थिति सामने आने पर निर्धारित शिकायत व्यवस्था का उपयोग करना चाहिए।
उज्ज्वल भविष्य के लिए दी शुभकामनाएं
कार्यक्रम के अंत में प्रधानाचार्य ने सभी नवप्रवेशित विद्यार्थियों को चिकित्सा शिक्षा की नई यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि विद्यार्थी अनुशासन, परिश्रम, नैतिकता और सेवा भाव को अपने जीवन का हिस्सा बनाते हुए अध्ययन करेंगे तथा भविष्य में चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देंगे। उन्होंने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य, बेहतर शैक्षणिक उपलब्धियों और एक संवेदनशील एवं कुशल चिकित्सक के रूप में विकसित होने की कामना की।
महाविद्यालय में आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को नए शैक्षणिक परिवेश से परिचित कराने के साथ-साथ उन्हें चिकित्सा पेशे की जिम्मेदारियों, अनुशासन और मरीजों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण का महत्व समझाने की दिशा में महत्वपूर्ण रहा।
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