अंक पहचानने से लेकर पहाड़ा सुनने तक… सवाल पूछे तो बच्चों की जिज्ञासा भी परखी, सहज अंदाज में समझाया पाठ
प्रदीप मिश्रा, प्रमुख संवाददाता

Gonda News
गोंडा। स्कूल में अचानक जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह पहुंचें और सामने बैठे बच्चों के बीच शिक्षक की भूमिका में नजर आएं तो नजारा कुछ अलग ही था। मंगलवार को विद्यालयों के औचक निरीक्षण के दौरान बीएसए अमित कुमार सिंह ने केवल व्यवस्थाओं और अभिलेखों की जांच तक निरीक्षण को सीमित नहीं रखा, बल्कि सीधे बच्चों के बीच पहुंचकर उनकी शैक्षिक समझ और सीखने की क्षमता को परखा। इस दौरान वह कुछ देर के लिए क्लास टीचर की भूमिका में नजर आए।
बच्चों के सामने पहुंचते ही उन्होंने सबसे पहले उनकी सहजता को परखा। बच्चों से अंक पहचानने के लिए कहा और अलग-अलग अंक दिखाकर उनकी पहचान पूछी। इसके बाद पहाड़ा सुना और गणित से जुड़े सवाल देकर बच्चों से उनके जवाब जाने। बच्चों ने भी बिना किसी झिझक के सवालों के जवाब दिए। जहां किसी बच्चे को जवाब देने में परेशानी हुई, वहां बीएसए ने शिक्षक की तरह उसे समझाया और सही तरीके से उत्तर तक पहुंचने का रास्ता बताया।
खास बात यह रही कि बीएसए ने बच्चों से बातचीत के दौरान अधिकारी वाला औपचारिक अंदाज छोड़कर बेहद सहज और सरल भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने बच्चों से उनके मन में उठने वाले सवालों के बारे में पूछा और यह जानने का प्रयास किया कि पढ़ाई के दौरान उन्हें किन विषयों या सवालों को समझने में कठिनाई होती है। बच्चों के जवाब सुनकर उन्होंने उनकी जिज्ञासा को और बढ़ाने का प्रयास किया। उनका जोर इस बात पर रहा कि बच्चे केवल पाठ को याद न करें, बल्कि सवाल पूछें, समझें और अपनी बात खुलकर रखें।
बीएसए का यह अंदाज देखकर विद्यालय के शिक्षक भी बच्चों की पढ़ाई को लेकर और अधिक सजग नजर आए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने शिक्षकों को बच्चों की बुनियादी शैक्षिक समझ मजबूत करने तथा कक्षा में बच्चों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
कई विद्यालयों का किया औचक निरीक्षण
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने मंगलवार को कटरा बाजार और हलधरमऊ क्षेत्र के कई विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान प्राथमिक विद्यालय कड़वाबाजार, कंपोजिट विद्यालय बैसहां, प्राथमिक विद्यालय बिरवा, प्राथमिक विद्यालय काशीपुरवा, उच्च प्राथमिक विद्यालय रामापुर, प्राथमिक विद्यालय विक्रमपुर, हलधरमऊ तथा प्राथमिक विद्यालय धोबहारा द्वितीय का जायजा लिया गया।
निरीक्षण में अनुपस्थित पाए गए शिक्षकों और शिक्षणेतर कर्मचारियों के संबंध में नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया। वहीं विद्यालयों में विकास कार्यों के अधूरे पाए जाने तथा अनियमितता सामने आने पर संबंधित प्रधानाध्यापक और प्रभारी प्रधानाध्यापक को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।
लेकिन इस पूरे निरीक्षण में सबसे अलग तस्वीर उस समय सामने आई, जब बीएसए बच्चों के बीच बैठकर उनके साथ संवाद करते और सवाल पूछते नजर आए। अधिकारी की इस सहजता ने बच्चों को भी खुलकर जवाब देने का मौका दिया। निरीक्षण का यह अंदाज इस बात का संदेश देता नजर आया कि विद्यालय की असली तस्वीर केवल रजिस्टर और व्यवस्थाओं से नहीं, बल्कि कक्षा में बैठे बच्चों की समझ और उनके सीखने के स्तर से भी सामने आती है।

