गंभीर से गंभीर रोगों का इलाज मेडिकल कॉलेज में कराने की तैयारी, रिफरल पर लगेगा अंकुश
दूसरे दिन भी अस्पताल परिसर, वार्डों और चिकित्सकीय संसाधनों का औचक निरीक्षण, मरीजों की सेवा और मेडिकल स्टूडेंट्स की शिक्षा को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता
प्रदीप मिश्रा, प्रमुख संवाददाता

Gonda News
गोंडा। राजकीय मेडिकल कॉलेज गोंडा के प्राचार्य का पदभार संभालने के दूसरे दिन मंगलवार को प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमार वर्मा एक बार फिर एक्शन में नजर आए। उन्होंने मेडिकल कॉलेज के अस्पताल परिसर, विभिन्न वार्डों और उपलब्ध चिकित्सकीय संसाधनों का औचक एवं गहन निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की हकीकत परखी। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना और मेडिकल स्टूडेंट्स को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं बेहतर चिकित्सकीय प्रशिक्षण देना उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में रहेगा।
नए प्राचार्य ने कहा कि मेडिकल कॉलेज को इस स्तर तक मजबूत किया जाएगा कि जिले के गंभीर से गंभीर रोगों के उपचार की सुविधाएं यथासंभव यहीं उपलब्ध हो सकें। उनका प्रयास रहेगा कि इलाज की समुचित सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को अनावश्यक रूप से दूसरे शहरों या अन्य अस्पतालों में रेफर न करना पड़े। इसके लिए चिकित्सकीय संसाधनों, विशेषज्ञ सेवाओं और अस्पताल की व्यवस्थाओं को लगातार मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।
मरीजों की सेवा सर्वोपरि : प्रिन्सिपल डॉ संतोष वर्मा
डॉ. संतोष कुमार वर्मा ने अस्पताल के विभिन्न वार्डों में पहुंचकर मरीजों को मिल रही सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने चिकित्सकीय संसाधनों की उपलब्धता, उनके उपयोग और अस्पताल की व्यवस्थाओं को करीब से देखा। कई स्थानों पर रुककर उन्होंने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से सीधे जानकारी ली तथा आवश्यक सुधार के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि अस्पताल आने वाला प्रत्येक मरीज बेहतर इलाज और सम्मानजनक व्यवहार का हकदार है। मरीजों की सेवा सर्वोपरि है। चिकित्सा व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। चिकित्सकों और कर्मचारियों को मरीजों के प्रति संवेदनशील रहते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन करना होगा।
मेडिकल स्टूडेंट्स की पढ़ाई और प्रशिक्षण पर विशेष जोर
कार्यवाहक प्राचार्य ने मेडिकल स्टूडेंट्स की शिक्षा और प्रशिक्षण को भी अपनी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का मुख्य ध्यान उनकी पढ़ाई और चिकित्सकीय सीख पर होना चाहिए। कक्षा में पढ़ाई के साथ अस्पताल में मिलने वाले व्यावहारिक अनुभव से ही एक बेहतर चिकित्सक तैयार होता है।
उन्होंने सभी प्रोफेसरों से विद्यार्थियों की पढ़ाई, प्रशिक्षण और चिकित्सकीय ज्ञान पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अस्पताल में मरीजों की जांच, उपचार प्रक्रिया और चिकित्सकीय कार्यों की बारीकियां सीखने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। प्रोफेसरों को विद्यार्थियों की शैक्षणिक गतिविधियों पर नियमित नजर रखने और उनके चिकित्सकीय प्रशिक्षण को मजबूत करने के निर्देश दिए।
मजबूत संस्थान के रूप में विकसित होगा मेडिकल कॉलेज
डॉ. वर्मा ने अपनी आगे की रणनीति बताते हुए कहा कि राजकीय मेडिकल कॉलेज को जिले के लिए मजबूत चिकित्सा संस्थान के रूप में विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उनका लक्ष्य बेहतर चिकित्सा सेवाओं के साथ गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा का ऐसा वातावरण तैयार करना है, जिससे मरीजों को इलाज के लिए बाहर जाने की जरूरत कम से कम पड़े और मेडिकल कॉलेज से निकलने वाले विद्यार्थी बेहतर चिकित्सक बन सकें।
उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज केवल इलाज का केंद्र नहीं, बल्कि चिकित्सा शिक्षा और चिकित्सकीय प्रशिक्षण का भी प्रमुख संस्थान है। इसलिए दोनों मोर्चों पर समान रूप से काम किया जाएगा। अस्पताल की व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी के साथ चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता पर भी लगातार नजर रखी जाएगी।
लगातार दूसरे दिन किया औचक निरीक्षण
कार्यवाहक प्राचार्य के लगातार दूसरे दिन अस्पताल पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लेने से अस्पताल प्रशासन में सक्रियता दिखाई दी। निरीक्षण के दौरान डॉ. अनिल तिवारी, सीएमएस, डॉ. दीक्षा द्विवेदी, हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेटर, डॉ. रजनीश सिंह, हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेटर, सुनीता देवी, मैट्रन तथा अवधेश सिंह, सुरक्षा पर्यवेक्षक समेत अन्य संबंधित अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
प्राचार्य ने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार एक सतत प्रक्रिया है। मरीजों की जरूरतों, चिकित्सकीय संसाधनों की उपलब्धता और मेडिकल स्टूडेंट्स के प्रशिक्षण को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाओं को लगातार बेहतर किया जाना चाहिए।
