गोंडा में सतह पर आ रही भाजपा की अंतर्कलह
कार्यकारिणी के बाद से भाजपा में खेमेबंदी, सोशल मीडिया पर आमने-सामने भाजपाई
सत्ता-संगठन की खींचतान के बीच पुराने कार्यकर्ताओं की नाराजगी मुखर, पोस्ट और टिप्पणियों में एक-दूसरे पर उठ रहे सवाल
प्रदीप मिश्रा, प्रमुख संवाददाता

फोटो सोर्स : सोशल मीडिया
Gonda News
गोंडा। भाजपा की नई जिला कार्यकारिणी के गठन के बाद संगठन के भीतर चल रही खींचतान अब सोशल मीडिया के मंच पर भी दिखाई देने लगी है। कार्यकारिणी में जगह पाने वाले और बाहर रह गए कार्यकर्ताओं के बीच नाराजगी के स्वर अलग-अलग अंदाज में सामने आ रहे हैं। कुछ कार्यकर्ता नई टीम को लेकर बधाई और संगठन मजबूत होने की बात कर रहे हैं तो दूसरी ओर कुछ पुराने कार्यकर्ता पद और जिम्मेदारियों के बंटवारे पर सवाल खड़े कर रहे हैं। इससे संगठन के भीतर खेमेबंदी की चर्चा तेज हो गई है।
गोंडा में नई जिला कार्यसमिति की घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर कार्यकर्ताओं की पोस्ट और टिप्पणियों ने इस बहस को और हवा दी है। सार्वजनिक रूप से किए जा रहे सवालों में पुराने कार्यकर्ताओं की भूमिका, अधिकारियों के स्तर पर सुनवाई, संगठन में शिकायतों के समाधान और राजनीतिक जिम्मेदारियों में कार्यकर्ताओं की हिस्सेदारी जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। स्थानीय स्तर पर सामने आए असंतोष के बीच सोशल मीडिया अब संगठन के भीतर की नाराजगी जाहिर करने का प्रमुख माध्यम बनता दिख रहा है।
एक सूची, दो तरह की प्रतिक्रियाएं
नई कार्यकारिणी की सूची सामने आने के बाद एक तरफ समर्थकों की ओर से पदाधिकारियों को बधाई देने का सिलसिला चला, वहीं दूसरी तरफ असंतुष्ट माने जा रहे कार्यकर्ताओं की टिप्पणियों में संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। खास बात यह है कि असहमति अब बंद कमरों की बैठकों तक सीमित नहीं दिख रही, बल्कि सोशल मीडिया पोस्ट और कमेंट के जरिये सार्वजनिक हो रही है। पूर्व जिला उपाध्यक्ष अनुपम प्रकाश मिश्र, पूर्व मीडिया प्रभारी राघवेन्द्र ओझा समेत कुछ वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की ओर से कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और सुनवाई से जुड़े सवाल पहले भी उठाए गए हैं। आजमगढ़ के वरिष्ठ नेता दिनेश सिंह की ओर से राष्ट्रीय संगठन को भेजे गए खुले पत्र में भी ऐसे ही मुद्दों का उल्लेख करते हुए पुराने कार्यकर्ताओं के सम्मान और शिकायतों के समाधान की जरूरत बताई गई है।
सत्ता में हिस्सेदारी और संगठन में सम्मान का सवाल
भाजपा के सामने चुनौती केवल पदों के बंटवारे की नहीं है। पुराने कार्यकर्ताओं का एक वर्ग यह सवाल उठा रहा है कि सत्ता में पार्टी की सरकार होने के बाद संगठन के लिए लंबे समय तक काम करने वाले कार्यकर्ताओं की भूमिका क्या होगी। आयोगों, निगमों और बोर्डों में राजनीतिक नियुक्तियों से लेकर स्थानीय स्तर पर अधिकारियों तक पहुंच और कार्यकर्ताओं की सुनवाई जैसे मुद्दे इसी असंतोष से जुड़े बताए जा रहे हैं। वहीं, संगठन से जुड़े लोगों का तर्क है कि बड़ी कार्यकारिणी में सभी कार्यकर्ताओं को पद देना संभव नहीं है और संगठनात्मक जिम्मेदारियां योग्यता, सक्रियता तथा चुनावी जरूरतों के आधार पर तय की जाती हैं। ऐसे में कार्यकारिणी को लेकर उठ रहे सवालों का अंतिम असर आने वाले संगठनात्मक कार्यक्रमों में ही दिखाई देगा।
2027 से पहले सोशल मीडिया बना नया अखाड़ा
विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भाजपा प्रदेश स्तर पर संगठन और सोशल मीडिया तंत्र को चुनावी जरूरतों के हिसाब से नए सिरे से सक्रिय कर रही है। प्रदेश भाजपा ने हाल में सोशल मीडिया और विभिन्न प्रकोष्ठों की नई टीम घोषित की है। ऐसे में गोंडा में संगठन के भीतर की नाराजगी का सोशल मीडिया पर खुलकर सामने आना नेतृत्व के लिए भी चुनौती है। सवाल यह है कि कार्यकर्ताओं के बीच उठ रहे मतभेद संवाद के जरिये सुलझेंगे या सोशल मीडिया पर चल रही आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति आगे और मुखर होगी। फिलहाल नई कार्यकारिणी के बाद भाजपा के भीतर संतुष्ट और असंतुष्ट खेमों की सक्रियता ने सियासी तापमान जरूर बढ़ा दिया है।
प्रदीप मिश्रा, प्रमुख संवाददाता 9415120996