28 साल पुराने बैनामे में दस्तावेजों से छेड़छाड़ का आरोप, अध्यापक समेत तीन पर मुकदमा
करोड़ों की जमीन पर वास्तविक हिस्से से अधिक कब्जे का प्रयास करने का आरोप, सीजेएम के आदेश पर दर्ज हुई एफआईआर
प्रदीप मिश्रा, प्रमुख संवाददाता
Gonda News
कर्नलगंज (गोण्डा)। 28 साल पुराने जमीन के बैनामे के दस्तावेजों में कथित हेराफेरी कर वास्तविक हिस्से से अधिक भूमि पर अधिकार हासिल करने के प्रयास का मामला सामने आया है। मामले में सरकारी अध्यापक कृष्ण कुमार मौर्य समेत तीन लोगों के खिलाफ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) गोण्डा के आदेश पर कर्नलगंज कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर दस्तावेजों की सत्यता, कथित छेड़छाड़ और नामांतरण की प्रक्रिया समेत पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
मामला ग्राम करूवा निवासी रुद्र नारायण सिंह (59) और रामबचन सिंह (54) पुत्र देवशरण सिंह की शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ताओं ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि मौजा सकरौरा ग्रामीण में स्थित उनकी जमीन के 1998 में किए गए बैनामे के दस्तावेजों में बाद में कथित तौर पर बदलाव किया गया। आरोप है कि इस बदलाव के माध्यम से खरीदी गई जमीन के वास्तविक हिस्से से कहीं अधिक भूमि पर अधिकार दर्शाने का प्रयास किया गया।
9 जुलाई 1998 को हुआ था बैनामा
शिकायत के अनुसार, 9 जुलाई 1998 को मौजा सकरौरा ग्रामीण स्थित कुल 5.05 एकड़ भूमि में से 1/12 हिस्सा, यानी करीब 0.42 एकड़ जमीन का बैनामा रामकुमार मौर्य और हरिप्रसाद मौर्य के पक्ष में किया गया था। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस बैनामे के आधार पर नियमानुसार नामांतरण की कार्रवाई भी हुई और छह नवंबर 1998 को नामांतरण दर्ज कर दिया गया था।
आरोप है कि मूल बैनामे के आधार पर जितनी भूमि का हस्तांतरण किया गया था, बाद में उसके दस्तावेजों में कथित रूप से बदलाव कर रकबे और गाटा संख्या को बढ़ाकर प्रस्तुत किया गया।
गाटा संख्या और रकबे में बदलाव का आरोप
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि उप निबंधक कार्यालय में सुरक्षित बैनामे की सरकारी प्रति में कथित हेराफेरी की गई। आरोप के मुताबिक बैनामे में दर्ज गाटा संख्या 3280/0.62 को बदलकर 3256/4.62 कर दिया गया। इसी तरह कुल जमीन का रकबा 5.05 एकड़ के स्थान पर 9.05 एकड़ और बेचे गए 1/12 हिस्से यानी करीब 0.42 एकड़ के स्थान पर 0.85 एकड़ यानी 5/12 हिस्सा दर्ज किए जाने का आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि दस्तावेजों में कथित बदलाव महज अभिलेखीय त्रुटि नहीं बल्कि जमीन के वास्तविक स्वामित्व और हिस्से को प्रभावित करने वाला गंभीर मामला है। उनका आरोप है कि बदले हुए अभिलेखों के आधार पर वास्तविक हिस्से से अधिक भूमि पर अधिकार स्थापित करने का प्रयास किया गया।
बदले दस्तावेजों के आधार पर दोबारा नामांतरण का आरोप
मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि कथित रूप से बदले गए दस्तावेजों के आधार पर कृष्ण कुमार मौर्य के साथ मिलकर जमीन का दोबारा नामांतरण करा लिया गया। इसकी जानकारी होने पर शिकायतकर्ताओं ने इसका विरोध किया। आरोप है कि विरोध करने पर उन्हें धमकी दी गई और जान से मारने की बात कही गई।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, इस मामले में अभिलेखों की जांच कर वास्तविक बैनामे और बाद में सामने आए दस्तावेजों का मिलान किया जाना आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दस्तावेजों में कोई बदलाव हुआ है या नहीं और यदि हुआ है तो वह कब और किस स्तर पर किया गया।
एसपी से शिकायत के बाद न्यायालय पहुंचे
शिकायतकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने मामले में कार्रवाई के लिए 22 अगस्त को पुलिस अधीक्षक गोण्डा को प्रार्थना पत्र दिया था। उनका आरोप है कि शिकायत के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए।
सीजेएम के आदेश के बाद कर्नलगंज कोतवाली पुलिस ने 16 सितंबर को कृष्ण कुमार मौर्य, हरिप्रसाद मौर्य और रामकुमार मौर्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471, 504 और 506 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस के सामने अब मूल बैनामे और उप निबंधक कार्यालय में उपलब्ध अभिलेखों का सत्यापन, गाटा संख्या एवं रकबे में कथित बदलाव की जांच, नामांतरण की दोनों प्रक्रियाओं की पड़ताल तथा दस्तावेजों की प्रमाणिकता की जांच प्रमुख चुनौती है।
प्रभारी निरीक्षक नरेंद्र प्रताप राय ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है। प्रकरण की गहनता से जांच की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों और अभिलेखों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बैनामे के अभिलेखों में वास्तव में किसी स्तर पर हेराफेरी हुई थी या नहीं और नामांतरण की प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है या नहीं।