शिक्षक केवल पाठ नहीं पढ़ाएं, विद्यार्थियों को जीवन की सही दिशा भी दें : डॉ. स्नेहलता शुक्ला
प्रदीप मिश्रा, प्रमुख संवाददाता
State desk
लखनऊ। अखिल विश्व गायत्री परिवार की ओर से आयोजित प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला में प्रतिभाग करने पहुंचीं शिक्षिका डॉ. स्नेहलता शुक्ला ने मीडिया से बातचीत में शिक्षक की बदलती भूमिका पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि युग निर्माता और भावी पीढ़ी के चरित्र निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम है।
डॉ. शुक्ला ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षक का दायित्व केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने और परीक्षा परिणाम तक सीमित नहीं रह सकता। शिक्षक अपने आचरण, विचार और व्यवहार के माध्यम से विद्यार्थियों के व्यक्तित्व एवं चरित्र को प्रभावित करता है। इसलिए बच्चों को ज्ञान के साथ संस्कार, अनुशासन, संवेदनशीलता, नैतिक मूल्यों तथा राष्ट्र के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी की भावना देना भी शिक्षक का महत्वपूर्ण दायित्व है।
उन्होंने कहा कि विद्यालय भावी नागरिकों के निर्माण की प्रयोगशाला है। यदि शिक्षक अपने दायित्व को नौकरी के बजाय मिशन के रूप में स्वीकार करें तो शिक्षा के माध्यम से समाज में व्यापक और सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चों के सामने शिक्षक का व्यवहार स्वयं एक पाठ की तरह होता है, इसलिए शिक्षक को अपने आचरण से विद्यार्थियों के सामने आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए।
डॉ. स्नेहलता शुक्ला ने कहा कि अखिल विश्व गायत्री परिवार की ओर से शिक्षकों के लिए आयोजित यह कार्यशाला सराहनीय पहल है। ऐसे आयोजनों से शिक्षकों में अपने दायित्व के प्रति नई ऊर्जा और उत्साह का संचार होता है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला में शिक्षकों को जिस प्रकार प्रेरित और प्रोत्साहित किया गया है, उसका सकारात्मक प्रभाव उनके कर्मक्षेत्र में दिखाई देगा।
उन्होंने विश्वास जताया कि शिक्षक यदि विद्यार्थियों में संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए गंभीरता से काम करें तो आने वाले समय में युवाओं में समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना और मजबूत होगी।
डॉ. शुक्ला ने कार्यशाला के आयोजन के लिए अखिल विश्व गायत्री परिवार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षकों को उनकी व्यापक जिम्मेदारी का एहसास कराने वाले ऐसे प्रयास शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि कार्यशाला में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डॉ. चिन्मय पाण्ड्या सहित संस्था के वरिष्ठ पदाधिकारियों एवं शिक्षाविदों ने भी शिक्षक को संस्कार, चरित्र और राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण कड़ी बताया। कार्यशाला में शिक्षक की व्यापक सामाजिक भूमिका पर जोर दिया गया।
डॉ. स्नेहलता शुक्ला ने कहा, “शिक्षक यदि केवल विषय पढ़ाने तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों को जीवन जीने की सही दिशा देना शुरू कर दें, तो शिक्षा समाज और राष्ट्र के भविष्य को बदलने की सबसे प्रभावशाली शक्ति बन सकती है।”