सीडीओ ने कहा बच्चों के हाथों में AI सौंपने से पहले जागरूकता जरूरी, फिर उपयोगिता का पाठ
सीडीओ अंकिता जैन के नवाचार का होगा विस्तार, सभी कस्तूरबा विद्यालयों की बेटियाँ अर्जित करेंगीं AI का ज्ञान
प्रदीप मिश्रा, प्रमुख संवाददाता

Gonda News
गोण्डा।
मुख्य विकास अधिकारी अंकिता जैन ने जिले में बच्चों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को उपयोगी और सुरक्षित बनाने का संकल्प लिया है। इस दिशा में उन्होंने पहले चरण में बच्चों को AI के दुष्प्रभावों से परिचित कराने का स्पष्ट खाका तैयार किया है। उनका मानना है कि बिना समझ और विवेक के तकनीक का प्रयोग बच्चों के लिए नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए AI को अपनाने से पहले उसकी सीमाओं और जोखिमों को जानना जरूरी है। इसके बाद ही बच्चों को AI के सकारात्मक और लाभदायक उपयोग के बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा।
इस अभिनव पहल की शुरुआत कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय, झंझरी में AI प्रयोगशाला की स्थापना से हुई। इसके पश्चात जिले के 10 शिक्षकों को आईआईटी कानपुर भेजकर AI से संबंधित विशेष प्रशिक्षण दिलाया गया। प्रशिक्षण लेकर लौटे ये शिक्षक अब मास्टर ट्रेनर की भूमिका निभाएंगे और कस्तूरबा विद्यालयों की अन्य शिक्षिकाओं, शिक्षकों व वार्डेन को AI का प्रशिक्षण देंगे। प्रशिक्षण प्रक्रिया पूरी होते ही जिले के अन्य कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों को भी AI लैब से लैस किया जाएगा और फिर वहां विधिवत AI की पढ़ाई शुरू होगी।
आईएएस अधिकारी अंकिता जैन वर्तमान में जिले में मुख्य विकास अधिकारी के पद पर तैनात हैं। आईएएस जैसी कठिन परीक्षा में टॉप रैंक हासिल कर चुकी अंकिता जैन का विशेष झुकाव तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की ओर है। वे बेटियों की शिक्षा को अत्यंत आवश्यक मानती हैं, यही कारण है कि कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों पर उनका खास फोकस है।
मुख्य विकास अधिकारी अंकिता जैन का कहना है कि AI बच्चों की पढ़ाई में सहायक तो हो सकता है, लेकिन शिक्षक की जगह नहीं ले सकता। उनके अनुसार शिक्षक ही वह माध्यम हैं जो बच्चों को सीखने की कला, याद रखने की क्षमता, सवाल पूछने और उनके उत्तर खोजने की आदत विकसित करते हैं तथा प्राप्त ज्ञान को स्थायी स्मृति में बदलने में अहम भूमिका निभाते हैं। यह कार्य न तो किताबें अकेले कर सकती हैं और न ही AI प्लेटफॉर्म में यह मानवीय संवेदनशीलता और मार्गदर्शन संभव है।
गौरतलब है कि अंकिता जैन सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘अभ्युदय’ के तहत संचालित प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग कक्षाओं में भी स्वयं पढ़ाने पहुंच जाती हैं। अपनी कक्षाओं में वे छात्रों को प्रेरित करती हैं और विषयगत पढ़ाई के माध्यम से छात्र-छात्राओं के बीच अपने प्रभावी शिक्षण कौशल की अलग पहचान बना चुकी हैं।
तकनीक और मानवीय शिक्षा के संतुलित समन्वय के साथ जिले में AI शिक्षा की यह पहल न केवल समय की मांग है, बल्कि भविष्य की पीढ़ी को जिम्मेदार, जागरूक और सक्षम बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है।
Ankita Jain IAS मुख्य विकास अधिकारी, गोंडा
तकनीक और मानवीय शिक्षा के संतुलित समन्वय के साथ जिले में AI शिक्षा की यह पहल न केवल समय की मांग है, बल्कि भविष्य की पीढ़ी को जिम्मेदार, जागरूक और सक्षम बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है।