छन्द रचना और गायन से संस्कृत सीखने का दिया प्रशिक्षण
प्रतियोगी परीक्षाओं और साक्षात्कार में भी उपयोगी है छन्द ज्ञान : प्रो. मंशाराम वर्मा
प्रदीप मिश्रा, प्रमुख संवाददाता
Gonda News
गोंडा। श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज के संस्कृत विभाग में शनिवार को संस्कृत छन्द रचना एवं गायन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ लौकिक मंगलाचरण के साथ हुआ। इसमें विद्यार्थियों को संस्कृत के प्रमुख छन्दों की रचना, उनके नियमों और गायन की विधियों का प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यक्रम के प्रशिक्षक डॉ. जगदम्बा प्रसाद सिंह ने मन्दाक्रान्ता, हरिणी, शिखरिणी, वसन्ततिलका, द्रुतविलम्बित और वंशस्थ आदि प्रमुख छन्दों की रचना के नियम और विधियों को विस्तार से समझाया। उन्होंने छन्द रचना के दौरान आवश्यक सावधानियों और अवधान बिंदुओं पर विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। बालगीतों के माध्यम से विद्यार्थियों में छन्द गायन की रुचि विकसित करने का भी प्रयास किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. मंशाराम वर्मा ने कहा कि छन्द ज्ञान संस्कृत के अध्ययन और समझ के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। “छन्दः पादौ तु वेदस्य” अर्थात छन्द को वेदपुरुष के चरण कहा गया है। उन्होंने कहा कि छन्द रचना और गायन के बिना संस्कृत को गहराई से समझना कठिन है। उन्होंने बताया कि संस्कृत विभाग की ओर से विद्यार्थियों को संस्कृत सीखने और उसे व्यवहार में लाने के लिए प्रत्येक वर्ष इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। छन्द ज्ञान विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं और साक्षात्कार की दृष्टि से भी उपयोगी है।
कार्यक्रम में सैन्य विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार तिवारी, डॉ. सुजीत सिंह और श्रवण कुमार सहित संस्कृत विभाग के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। इनमें दीपिका पाण्डेय, प्रिया प्रजापति, आकांक्षा, अंशिका, आस्था त्रिपाठी, ममता मिश्रा, आरती पांडे, आराध्या त्रिपाठी, अनामिका ओझा, सदानंद यादव, वैभव शुक्ला, शिवनारायण मिश्रा, रितिक कनौजिया, प्राची, श्रेया तिवारी, चांदनी भारती, मनीषा, निधि, मनीष कश्यप, सुभाष चंद्र तिवारी, शनी कुमार और कोमल पाठक की विशेष उपस्थिति रही।