मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीजों की राह होगी आसान, बनेगा एक और प्रवेश द्वार
परिसर के भीतर जाम की समस्या दूर करने की तैयारी, नवागत प्रधानाचार्य प्रो. डॉ. संतोष वर्मा ने निरीक्षण कर तय की प्राथमिकताएं
35 वेंटिलेटर वाले आईसीयू को जल्द शुरू कराने की कवायद, स्टाफ, दवाओं और जरूरी संसाधनों के लिए शासन को भेजा जाएगा प्रस्ताव
प्रदीप मिश्रा, प्रमुख संवाददाता
Gonda News
गोंडा। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध अस्पताल में मरीजों और तीमारदारों की आवाजाही सुगम बनाने के लिए एक और प्रवेश द्वार बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। अस्पताल परिसर के भीतर ही वाहनों का दबाव बढ़ने से आए दिन लगने वाले जाम और उसमें मरीजों के वाहनों तथा एंबुलेंस के फंसने की समस्या को देखते हुए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इसके स्थायी समाधान की रणनीति तैयार की है। नवागत प्रधानाचार्य प्रोफेसर डॉ. संतोष वर्मा ने गुरुवार को अस्पताल परिसर का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और मरीजों की सुविधा से जुड़ी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर कराने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान अस्पताल में वाहनों की आवाजाही, मरीजों के प्रवेश और निकास तथा एंबुलेंस के आवागमन की स्थिति को बारीकी से देखा गया। अस्पताल के मुख्य प्रवेश मार्ग पर एक ही समय में मरीजों, तीमारदारों, कर्मचारियों और एंबुलेंस के वाहनों का दबाव बढ़ने से कई बार परिसर के भीतर ही जाम की स्थिति बन जाती है। इससे गंभीर मरीजों को लेकर आने वाली एंबुलेंस को भी रास्ता मिलने में परेशानी होती है। प्रधानाचार्य ने इस समस्या को केवल तात्कालिक स्तर पर नियंत्रित करने के बजाय स्थायी समाधान की दिशा में कदम बढ़ाने की बात कही। इसके तहत अस्पताल के लिए एक अतिरिक्त प्रवेश द्वार बनाए जाने की योजना पर काम शुरू किया गया है।
35 वेंटिलेटर, लेकिन दो ही इस्तेमाल में
मेडिकल कॉलेज अस्पताल में गंभीर मरीजों के उपचार की सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में आईसीयू को जल्द शुरू कराने की कवायद भी तेज कर दी गई है। अस्पताल में आईसीयू वार्ड उपलब्ध है और वहां 35 वेंटिलेटर मशीनें भी मौजूद हैं, लेकिन प्रशिक्षित चिकित्सकीय एवं पैरामेडिकल स्टाफ, आवश्यक दवाओं और अन्य जरूरी संसाधनों के अभाव में इनका अपेक्षित उपयोग नहीं हो पा रहा है। वर्तमान में अस्पताल प्रशासन केवल दो वेंटिलेटर को ही संचालित करने में सक्षम है।
प्रधानाचार्य प्रो. डॉ. संतोष वर्मा ने बताया कि आईसीयू को पूरी क्षमता के साथ शुरू कराने के लिए शासन को विस्तृत पत्र भेजा जाएगा। इसमें आवश्यक बजट, चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, तकनीकी कर्मचारियों, दवाओं और अन्य जरूरी उपकरण एवं सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित कराने का अनुरोध किया जाएगा। उनका कहना है कि संसाधन और मानवबल उपलब्ध होते ही आईसीयू की क्षमता का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। इससे गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार के लिए दूसरे शहरों या बड़े चिकित्सा संस्थानों की ओर रेफर करने की जरूरत कम होगी।
निरीक्षण के बाद मीडिया से साझा की प्राथमिकताएं
अस्पताल परिसर के निरीक्षण के बाद प्रधानाचार्य प्रोफेसर डॉ. संतोष वर्मा ने मेडिकल कॉलेज में मीडिया कर्मियों से बातचीत की। उन्होंने चिकित्सा महाविद्यालय और संबद्ध अस्पताल की आगामी प्राथमिकताओं को साझा करते हुए कहा कि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है। अस्पताल की व्यवस्थाओं को इस तरह विकसित किया जाएगा कि मरीजों को इलाज के लिए अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।
उन्होंने कहा कि शासन चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में व्यापक बदलाव और सुविधाओं के विस्तार की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन भी इन प्रयासों के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहा है। इसका सीधा लाभ आम लोगों को अपने ही क्षेत्र में बेहतर और अपेक्षाकृत कम खर्च में इलाज के रूप में मिलेगा।
प्रधानाचार्य ने कहा कि मेडिकल कॉलेज केवल गंभीर बीमारियों के उपचार का केंद्र ही नहीं, बल्कि चिकित्सा शिक्षा और विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाओं का महत्वपूर्ण केंद्र भी है। इसलिए अस्पताल की आधारभूत सुविधाओं से लेकर मरीजों की सुविधा, चिकित्सा संसाधन, मानवबल और उपचार की गुणवत्ता तक सभी पहलुओं को चरणबद्ध तरीके से मजबूत किया जाएगा।
मरीजों की सुविधा पर रहेगा विशेष जोर
नवागत प्रधानाचार्य ने स्पष्ट किया कि अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार का केंद्र बिंदु मरीज और उनके तीमारदार होंगे। प्रवेश और निकास व्यवस्था को बेहतर बनाने, एंबुलेंस की निर्बाध आवाजाही, अस्पताल परिसर में वाहनों के दबाव को कम करने और गंभीर मरीजों के लिए त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। आईसीयू के संचालन को लेकर शासन स्तर पर आवश्यक पत्राचार के साथ ही अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे।
इस दौरान मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल तिवारी, हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेटर डॉ. दीक्षा द्विवेदी, हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेटर डॉ. रजनीश सिंह समेत मेडिकल कॉलेज के अधिकारी मौजूद रहे।