मानदेय बढ़ोतरी पर अनुदेशकों में खुशी की लहर
प्रदीप मिश्रा, प्रमुख संवाददाता

Gonda News
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाकर 17 हजार रुपये प्रतिमाह किए जाने की घोषणा के बाद जिले भर के अनुदेशकों में खुशी की लहर है। लंबे समय से मानदेय बढ़ोतरी की मांग कर रहे अनुदेशकों ने इस फैसले को राहत भरा कदम बताया है, हालांकि महंगाई के मौजूदा दौर को देखते हुए इसे पर्याप्त नहीं मानते हुए और वृद्धि की मांग भी तेज हो गई है।
अनुदेशक संगठन के जिलाध्यक्ष अजय प्रताप सिंह ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह बढ़ोतरी निश्चित रूप से अनुदेशकों को कुछ राहत प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि लंबे समय से अनुदेशक आर्थिक तंगी और बढ़ती महंगाई के बीच कार्य कर रहे थे, ऐसे में यह निर्णय सकारात्मक पहल है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में 17 हजार रुपये का मानदेय पर्याप्त नहीं है। महंगाई लगातार बढ़ रही है और परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में अनुदेशकों का मानदेय कम से कम 25 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाना चाहिए, ताकि वे सम्मानजनक जीवन यापन कर सकें।
अजय प्रताप सिंह ने कहा कि अनुदेशक शिक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और विद्यालयों में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने में उनकी अहम भूमिका होती है। इसके बावजूद लंबे समय से उनका मानदेय अपेक्षाकृत कम रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि अनुदेशकों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए शीघ्र ही मानदेय को 25 हजार रुपये तक बढ़ाने पर विचार किया जाए।
जिले के विभिन्न ब्लॉकों में कार्यरत अनुदेशकों ने भी मानदेय बढ़ोतरी पर खुशी जताई, लेकिन साथ ही यह उम्मीद भी व्यक्त की कि सरकार उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी। अनुदेशकों का कहना है कि वे पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं, इसलिए उन्हें भी सम्मानजनक मानदेय मिलना चाहिए।