गोंडा में हाशिये पर धकेले गए बाल विकास कर्मियों के अधिकार

उत्तर प्रदेश गोंडा
गोंडा में कर्मचारियों के अधिकार हाशिये पर, टार्गेट के दबाव में रद्द हो रही छुट्टियां; विभागीय कर्मियों में बढ़ा आक्रोश
महिला कर्मचारियों के लिए दोहरी मुसीबत, घर सम्भाले या नौकरी, इस बीच आराम भी हुआ हराम
प्रदीप मिश्रा, प्रमुख संवाददाता

Gonda News

गोंडा।
बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग में कार्यरत कर्मचारियों के अधिकार इन दिनों हाशिये पर जाते दिखाई दे रहे हैं। विभागीय कार्यों के टार्गेट और शासन हित का हवाला देकर लगातार छुट्टियां रद्द किए जाने से कर्मचारियों में गहरा असंतोष और आक्रोश पनप रहा है। हालात यह हैं कि विभागीय कर्मचारियों को बिना अवकाश के लगातार काम करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे उनका कामकाजी ही नहीं बल्कि पारिवारिक जीवन भी प्रभावित हो रहा है।
बताया जाता है कि जिला कार्यक्रम अधिकारी संजय कुमार द्वारा जारी आदेश में दूसरे शनिवार और रविवार के नियमित अवकाश को भी निरस्त कर दिया गया है। साथ ही सभी कर्मचारियों को कार्यालय खोलने तथा बिना अनुमति मुख्यालय न छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। इस आदेश के बाद विभागीय कर्मचारियों के साथ-साथ आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं में भी नाराजगी बढ़ती जा रही है।
कर्मचारियों का कहना है कि दिसंबर माह से चल रहे विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के बाद से ही लगातार छुट्टियां रद्द करने के आदेश जारी किए जा रहे हैं। इस दौरान दफ्तर नियमित रूप से खुले रहे और कर्मचारियों को बिना किसी विश्राम के काम करना पड़ा। कर्मचारियों के अनुसार लगातार काम के दबाव से मानसिक और शारीरिक थकान बढ़ रही है, लेकिन उनकी समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा।
कर्मचारियों का आरोप है कि प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना, टेक होम राशन (टीएचआर) वितरण और लाभार्थियों के चेहरा प्रमाणीकरण (एफआरएस) जैसे कार्यों के निर्धारित लक्ष्य पूरे न होने को भी एसआईआर अभियान के साथ जोड़कर अवकाश रद्द किए जा रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि अब जबकि एसआईआर अभियान लगभग पूरा होने की स्थिति में है, तब भी अन्य योजनाओं के कार्यों का हवाला देकर छुट्टियां रद्द करने का सिलसिला जारी रखा गया है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार ऐसी स्थिति अन्य जिलों की तुलना में गोंडा में अधिक गंभीर दिखाई दे रही है। कर्मचारियों का कहना है कि शासन के हित के नाम पर लिए जा रहे फैसलों का सीधा असर कर्मचारियों के अधिकारों और उनके स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। लगातार अवकाश निरस्त किए जाने से विभागीय माहौल भी प्रभावित हो रहा है।
उधर जिला कार्यक्रम अधिकारी संजय कुमार का कहना है कि यह निर्णय शासन के हित और विभागीय योजनाओं के कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा कराने के उद्देश्य से लिया गया है। उनके अनुसार विशेष पुनरीक्षण कार्य तथा विभिन्न योजनाओं के लक्ष्य पूरे कराने के लिए यह व्यवस्था अस्थायी रूप से लागू की गई है।
फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर कर्मचारियों में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि यदि उनकी समस्याओं और अधिकारों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो वे इस मुद्दे को उच्च स्तर तक उठाने के लिए बाध्य होंगे। वहीं कर्मचारियों की बढ़ती नाराजगी के बीच यह सवाल भी उठने लगा है कि शासन के हित के नाम पर कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी आखिर कब तक जारी रहेगी।

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