संवेदनशून्यता : शीतलहर में भी खुले हैं जिले के आँगनबाड़ी केंद्र

गोंडा उत्तर प्रदेश
शीतलहर में भी खुले आंगनबाड़ी केंद्र, ठिठुरते नौनिहालों पर भारी विभागीय उदासीनता
कक्षा एक से आठ तक के स्कूलों में शीतलहर के चलते हो गई है छुट्टी
प्रदीप मिश्रा, प्रमुख संवाददाता

Gonda News

गोंडा। कड़ाके की ठंड और शीतलहर ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। जिले में कक्षा एक से लेकर आठ तक के सभी विद्यालयों में बच्चों की छुट्टी घोषित कर दी गई है, लेकिन सबसे ज्यादा असहाय और नाजुक नौनिहालों के लिए चलने वाले आंगनबाड़ी केंद्र अब भी खुले हैं। ठंड से कांपते मासूम बच्चों को देखकर भी बाल विकास विभाग का दिल नहीं पसीज रहा।
सुबह-सुबह घने कोहरे और सर्द हवाओं के बीच तीन से छह वर्ष तक के छोटे-छोटे बच्चे आंगनबाड़ी केंद्रों पर पहुंच रहे हैं। कई केंद्रों पर न तो पर्याप्त गर्म व्यवस्था है और न ही बच्चों को ठंड से बचाने के समुचित इंतजाम। फर्श पर बैठकर पढ़ने और भोजन करने को मजबूर नौनिहाल ठंड में सिकुड़ते नजर आते हैं। ग्रामीण इलाकों में तो हालात और भी बदतर हैं, जहां कई केंद्रों पर दरवाजे-खिड़कियां तक ठीक नहीं हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बड़े बच्चों को शीतलहर के चलते घर पर सुरक्षित रखा जा रहा है, तो फिर नन्हे बच्चों को क्यों ठंड में भेजा जा रहा है। अभिभावकों का कहना है कि मजबूरी में बच्चों को केंद्र भेजना पड़ रहा है, क्योंकि छुट्टी का कोई आदेश नहीं है। कई माता-पिता ने बच्चों के बीमार पड़ने की आशंका जताई है।
इस संबंध में जब जिला कार्यक्रम अधिकारी संजय कुमार से बात की गई तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों में छुट्टी को लेकर कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है, इसलिए केंद्र खुले हैं। उनका यह बयान विभागीय नियमों की दुहाई तो देता है, लेकिन मासूमों की सेहत और सुरक्षा पर उठ रहे सवालों का जवाब नहीं देता।
गौरतलब है कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर पढ़ने वाले बच्चे सबसे कम उम्र के और सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं। ठंड, कोहरा और शीतलहर उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती है। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर कोई पहल न होना प्रशासनिक संवेदनहीनता को उजागर करता है।

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