मनरेगा का नाम बदलने पर कॉग्रेस नेताओं ने जताया आक्रोश

गोंडा

मनरेगा का नाम बदलने की कोशिश दुर्भाग्यपूर्ण, कांग्रेस स्वीकार नहीं करेगी : राम प्रताप सिंह

प्रदीप मिश्रा, प्रमुख संवाददाता
Gonda News

गोंडा। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक राम प्रताप सिंह तथा जिला मीडिया प्रभारी शिव कुमार दुबे ने संयुक्त रूप से जारी वक्तव्य में भाजपा सरकार के प्रति आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा भाजपा सरकार कांग्रेस सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का केवल नाम बदलकर वाहवाही लूटने का प्रयास कर रही है, जबकि मूल अवधारणा और उद्देश्य कांग्रेस की देन है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यूपीए-2 सरकार के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सुनिश्चित करने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) लागू किया गया था, जिसके तहत गांवों में 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी गई। वर्तमान सरकार द्वारा रोजगार के दिनों को 125 किए जाने का कांग्रेस ने स्वागत किया है, लेकिन योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाने की किसी भी कोशिश को कांग्रेस पार्टी कभी स्वीकार नहीं करेगी।

उन्होंने कहा कि जिस महात्मा गांधी ने देश की आज़ादी के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया, जिनका सम्मान केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के अनेक देशों में उनकी प्रतिमाएं स्थापित कर किया जाता है, उसी महापुरुष के नाम को हटाने की सोच दुर्भाग्यपूर्ण है। यह न केवल ऐतिहासिक तथ्यों की उपेक्षा है, बल्कि राष्ट्र की आत्मा पर भी आघात है।

कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार से अपील की कि वह इस विषय पर पुनर्विचार करे और मनरेगा योजना को उसके मूल नाम और भावना के साथ जारी रखे। उन्होंने कहा कि नाम बदलने के बजाय यदि सरकार योजना को और सशक्त बनाती है तो देशवासी प्रसन्न होंगे। भाजपा को यह ध्यान रखते हुए निर्णय लेना चाहिए कि जनभावनाओं और राष्ट्रपिता के सम्मान से कोई समझौता स्वीकार्य नहीं है।

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