तीन वर्ष बाद संविदा सीडीपीओ अंजना कुमारी झा की वापसी, जुलाई 2026 तक बढ़ा कार्यकाल; संविदा कर्मियों को बड़ी राहत
प्रदीप मिश्रा, प्रमुख संवाददाता

Gonda News
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के लिए यह खबर संजीवनी साबित होने जा रही है। बीते तीन वर्षों से विभाग से बाहर रहीं संविदा बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) अंजना कुमारी झा की वापसी का रास्ता साफ हो गया है। शासन स्तर से उनके कार्यकाल विस्तार को मंजूरी मिल चुकी है और निदेशक के माध्यम से आदेश जारी होने के बाद जिला स्तर पर औपचारिक आदेश आने की प्रतीक्षा की जा रही है। निदेशक स्तर से उनका कार्यकाल जुलाई 2026 तक बढ़ाया गया है।
सीडीपीओ अंजना कुमारी झा ने बताया कि शासनादेश निदेशक को प्राप्त हो चुका है। अब निदेशक का आदेश जिले पर आने के बाद पुनः कार्यभार ग्रहण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उनकी वापसी से जिले में बाल विकास से जुड़े कार्यक्रमों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
गौरतलब है कि जिले में लंबे समय से सीडीपीओ समेत अन्य संविदा पदों की कमी बनी हुई थी। इसका सीधा असर आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन, पोषण अभियान, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ रहा था। ऐसे में अनुभवी और मेहनती अधिकारी की वापसी को विभाग के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
इतना ही नहीं, बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न परियोजनाओं में जिले में तैनात संविदा सीडीपीओ, सुपरवाइजर और लिपिक संवर्ग के कर्मचारियों के कार्यकाल विस्तार को भी शासन की मंजूरी मिल गई है। कार्यकाल विस्तार का आदेश लंबित रहने के कारण ये संविदा कर्मचारी काफी समय से मानदेय से वंचित चल रहे थे, जिससे उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
शासन से मंजूरी मिलने के बाद अब इन सभी संविदा कर्मियों को न सिर्फ सेवा में निरंतरता मिलेगी, बल्कि लंबित मानदेय भुगतान की उम्मीद भी जगी है। विभागीय सूत्रों के अनुसार निदेशक के आदेश के बाद जिला स्तर पर प्रक्रिया पूरी होते ही कर्मचारियों को पुनः कार्यभार ग्रहण कराया जाएगा और मानदेय भुगतान की कार्रवाई भी शुरू की जाएगी।
अपने पूर्व कार्यकाल के दौरान अंजना कुमारी झा ने विभागीय योजनाओं के बेहतर संचालन, आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्थाओं में सुधार और बाल एवं मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसी वजह से विभाग में उनकी पहचान एक कर्मठ, जिम्मेदार और जमीनी स्तर पर सक्रिय सीडीपीओ के रूप में बनी हुई है। संविदा सीडीपीओ अंजना कुमारी झा की वापसी और अन्य संविदा कर्मियों के कार्यकाल विस्तार से बाल विकास विभाग को प्रशासनिक मजबूती मिलेग, योजनाओं के धरातल पर प्रभावी क्रियान्वयन से लाभार्थियों को सीधा फायदा मिलेगा।