एआई ने बदली दुनिया की तस्वीर, डिजिटल साक्षरता समय की अनिवार्यता
श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस संपन्न
प्रदीप मिश्रा, प्रमुख संवाददाता

Gonda News
गोंडा। श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज के ललिता शास्त्री सभागार में “व्यापार एवं अर्थव्यवस्था के भविष्य को संवारता एआई, उद्यमिता एवं सतत विकास” विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस का समापन भव्य रूप से हुआ। समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए प्रबंध तंत्र के सचिव उमेश शाह ने कहा कि एआई ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के युग में क्रांतिकारी परिवर्तन ला दिया है। समुद्र की गहराई से लेकर अंतरिक्ष तक, इंजीनियरिंग, मेडिकल साइंस, सूचना प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और व्यवसाय सहित सभी क्षेत्रों में एआई का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति को डिजिटल साक्षरता की ओर उन्मुख होना होगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य बी.पी. सिंह ने की। आईक्यूएसी के समन्वयक प्रो. जितेंद्र सिंह ने समापन समारोह में उपस्थित सभी अतिथियों का पुष्प गुच्छ, स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत किया तथा भौतिक विज्ञान में एआई की दक्षता और उद्यमिता के भविष्य पर प्रकाश डाला। बीबीए विभागाध्यक्ष डॉ. शैलजा सिंह ने कुशल मंच संचालन किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. स्मृति शिशिर ने प्रस्तुत किया।
समापन से पूर्व प्रातः 10 बजे तृतीय टेक्निकल सत्र आयोजित हुआ, जिसमें डॉक्टर अनूप सिंह, अध्यक्ष डामा न्यूजीलैंड ने कंप्यूटर विजन, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग और नवाचार विषयों पर विस्तार से चर्चा करते हुए एआई ज्ञान की आवश्यकता पर जोर दिया। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी वारंगल के प्रो. उमा माहेश्वर राय ने मल्टी कंपोनेंट एलॉय डिजाइन में मशीन लर्निंग की भूमिका पर प्रकाश डाला, जबकि नेशनल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन के प्रो. राघवेंद्र नायक ने एआई को नए कौशल का ब्लूप्रिंट बताया। इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. संजय पांडे एवं सह-अध्यक्षता प्रो. अरविंद कुमार शर्मा ने की, जबकि प्रतिवेदक डॉ. मनीष कुमार शर्मा रहे।
चौथे टेक्निकल सत्र की अध्यक्षता प्रो. अभय श्रीवास्तव ने की, सह-अध्यक्ष डॉ. रेखा शर्मा रहीं और प्रतिवेदक डॉ. अवधेश वर्मा रहे। इस सत्र के मुख्य वक्ता चितकारा विश्वविद्यालय, पंजाब के डॉ. दिव्यांश कुमार तथा डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के डॉ. पवन कुमार चौरसिया रहे।
दो दिवसीय कांफ्रेंस के सफल आयोजन में मुख्य नियंत्रक प्रो. अमन चंद्र, प्रो. संदीप कुमार श्रीवास्तव, प्रो. शशि बाला, डॉ. चमन कौर, डॉ. संतोष श्रीवास्तव, डॉ. वंदना भारतीय, डॉ. शिशिर त्रिपाठी, डॉ. स्मिता सिंह, डॉ. मनोज मिश्रा, डॉ. स्मृति शिशिर, डॉ. मुक्ता टंडन, डॉ. अंकित मौर्य, राकेश मिश्रा, विजय सिंह एवं मुक्ताराम का योगदान सराहनीय रहा। कांफ्रेंस में देश-विदेश से लगभग 600 प्रतिभागियों ने सहभागिता की, जिन्हें प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
